आप अंधेरा देख रहे है, मुझे
आसमान के छोर पर फूटती सूरज की रोशनी दिख रही है.
आप फासिज्म देख रहे हैं, मैं
दुम दबाकर पीछे हटता ब्राह्मणवाद देख रहा हूं, जो कभी कभार काट
खाने को दौड़ता है. यह मेरे लिए पिछले ढाई हजार साल का सबसे उजाला समय है.
इतने दलित, आदिवासी और
ओबीसी पहले कब पढ़ लिख रहे थे. इतने अनुपात में लड़कियां कब घर से बाहर निकल रही
थीं. सत्तर साल से कम समय में देश में उन समुदायों का करोडों लोगाें का मिडिल
क्लास बन गया है, जिन्हें कुछ समय पहले तक संपत्ति का अधिकार
नहीं था.
समय को और अच्छा होना चाहिए. होकर रहेगा. मैं
उम्मीद से हूं. मुश्किलें हैं, पर पहली बार मुश्किलों से लड़ाई भी है.
होगा आपके लिए अंधेरा समय. मैं आसमान के छोर पर
सूरज का उजाला देख रहा हूं. इसलिए मैं एक खुश व्यक्ति हूं. उत्साह से भरपूर. हमेशा
जीवन के पक्ष में, मृत्यु के विरुद्ध.
ये दिखावटी रोना-धोना मुझे सख्त नापसंद है.
जय जोहार,
जय मूलनिवासी,
जय जय गोंडवाना.......

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