1-National Register of citizens
(NRC) का
प्रयोग:
राष्ट्रीय
नागरिकता पंजीकरण रजिस्टर (NRC) का
प्रयोग भारत में
सर्वप्रथम असम में
किया गया। यह
प्रयोग करने का
प्रयोजन समझना जरूरी है
।यह समस्या भारत
के विभाजन से
पैदा हुई अन्यथा
बांग्लादेश का नागरिक
भारत का ही
नागरिक होता और
यह समस्या पैदा
नहीं होती ।तो
विभाजन किसने किया ? यह
विभाजन गांधी - नेहरू के
द्वारा किया गया
जिसके दस्तावेजी सबूत
हैं ।उसके अनुसार
दिनांक 15 मार्च 1947 को डॉ
बाबासाहेब आंबेडकर ने संविधान
सभा को स्टेटस
एंड मॉयनारिटी नाम
का मेमोरेंडम दिया
और उसमें गांधी
जी के द्वारा
जो संयुक्त चुनाव
क्षेत्र पुना पैक्ट
के जरिए थोपा
गया था ,उस
को बदलने की
मांग की गई
थी, और अंग्रेजों
ने इस मांग
को स्वीकार करने
का आश्वासन दिया
था ।
इस आश्वासन
को दबाने के
लिए गांधी -नेहरू
ने भारत विभाजन
का प्रस्ताव गवर्नर
जनरल माउंटबेटन को
दिया और कहा
कि यदि अनुसूचित
जाति और अनुसूचित
जनजाति के लोगों
को आजाद भारत
में पृथक चुनाव
क्षेत्र नहीं दिया
जाता है तो
हम लोग भारत
के टुकड़े करने
के लिए रजामंद
हो सकते हैं।
इस तरह माउंटबेटन
ने भारत के
टुकड़े करने का
गांधी- नेहरु का प्रस्ताव स्वीकार
किया और आजाद
भारत में अनुसूचित
जाति और अनुसूचित
जनजाति के स्वतंत्र
राजनीतिक अधिकारों की बलि
दिया और ओबीसी
की जाति आधारित
गिनती ना कराने
का अधिकार अपने
नियंत्रण में लिया
। इस तरह
से आजाद भारत
में इन को
गुलाम बनाने में
कामयाब हो गए।
इसके साथ ही
पिछड़े वर्ग ओबीसी
को हिंदू बनाकर
ब्राह्मणों का गुलाम
बनाकर रखा यह
बात मुसलमानों को
पता नहीं है
और दूसरे अल्पसंख्यक
लोगों को भी
पता नहीं है
इसलिए इसे जानना
और समझना बहुत
जरूरी है।
2•दिनांक
26 जनवरी 1950 के बाद:
26 जनवरी 1950 को
भारत में संविधान
लागू हुआ और
संविधान ने प्रौढ
मताधिकार लागू किया
किन्तु कम्पलसरी एजुकेशन की
बात को कांग्रेश
ने आजाद भारत
में लागू नहीं
किया। क्योंकि नेहरू
के नेतृत्व वाली
सरकार ब्राह्मणराज की
सरकार थी ।इसलिए
उन्होंने संविधान पर अमल
करने के बजाय
मनुष्मृती पर अमल
किया। मगर एक्सरसाइजिंग
ऑफ नोट्स की
वजह से एससी,
एसटी और ओबीसी
के लोग आजाद
भारत में पॉलिटिकली
काफी जागृत हुए
और राज्यों में
ब्राह्मणराज को वर्ण
व्यवस्था के अधीन
-
A•Intermediatry Castes
जैसे
महाराष्ट्र में मराठा,
गुजरात में लेवा
, कड़वा और पटेल,
उत्तर भारत में
जाट ,कर्नाटक में
ओक्कालिंगा और
लिंगायत , आन्र्धा प्रदेश में
कन्ना और रेड्डी, तमिलनाड
में नायर और
दूसरे पिछड़े वर्ग
की जातियों और
केरला में नायर
आदि जातियों ने
चुनौती देने का
काम किया ।
इस वजह से
ब्राह्मणराज के सामने
बहुत बड़ा संकट
खड़ा हो गया
और ब्राह्मणों को
इस चुनौती का
मुकाबला करने के
लिए सोचने पर
मजबूर होना पड़ा
।
B•पिछड़ा
वर्ग (OBC): केवल मध्यम
जातियों ने ही
ब्राह्मणों को चुनौती
नहीं दी बल्कि
पिछड़े वर्ग (ओबीसी) की
जातियों ने भी
चुनौती देने का
काम किया इसमें
खासतौर पर कुर्मी,
कोइरी और अहिर
जातियाँ शामिल हैं। इससे
ब्राह्मणराज के सामने
संकट और गहरा
हो गया। ब्राह्मणराज
को इस चुनौती
का भी उपाय
ढूंढना जरूरी हो गया।
यह पाश्वव्रभूमि एनआरसी
को समझने के
लिए जरूरी है।
3•उपरोक्त
पाश्वर्भूमि के अंतर्गत:
उपरोक्त पाश्वर्वभूमि के संदर्भ
में असम में
यह आंदोलन शुरू
हुआ है। इस
आंदोलन में कांग्रेस
और बीजेपी ने
अपनी-अपनी भूमिका
का निर्वहन किया
है। इसमें असम
के विद्यार्थियों को
सामने रखा और
पर्दे के पीछे
से संघ परिवार
और कांग्रेस खेल
खेलते रहे। इसके
परिणाम स्वरूप असम गण
परिषद का निर्माण
हुआ और असम
गण परिषद का
कब्जा हो गया
। मगर इसके
पीछे कांग्रेस और
संघ परिवार का
गुप्त रूप से
हाथ था। यह
असली वजह है
कि आज असम
मे संघ परिवार
का मुख्यमंत्री है
और असम गण
परिषद दोयम दर्जे
की भूमिका अदा
करने के लिए
मजबूर है ।
4•ब्राह्मणों
का संख्या बल:
भारत में राज
निहाय ब्राह्मणों की
संख्या अल्प और
अत्यल्प है, मगर
पूरे भारत में
यह 3•5 प्रतिशत हैं इमानदारी
से अगर चुनाव
कराया जाए तो
ब्राम्हण अपनी संख्या
बल से ग्राम
पंचायत का पंच
भी चुनवा कर
नहीं ला सकते
और गांव का
सरपंच लाना तो
बहुत दूर की
बात है। इसलिए
सत्ता पर वर्चस्व
बनाए रखने हेतु
ब्राह्मणों की पार्टियों
ने चुनाव में
सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार
का रास्ता अपनाया
था और न्यायपालिका इस
भ्रष्टाचार को रोकने
में विफल हो
गई केवल भ्रष्टाचार
से ही नहीं,
ब्राह्मणों की राष्ट्रीय
पार्टियों ने मनी
माफी और मीडिया
का सबसे ज्यादा
इस्तेमाल किया और
आज की तारीख
में इसके अलावा
अल्पसंख्यक ब्राह्मणों को धार्मिक
ध्रुवीकरण करके एससी
,एसटी और ओबीसी
को अपने अधीन
करना बहुत जरूरी
हुआ।
5• आज
NRC औरCAA का मतलब:
आज
NRC और CAA2019 ने देश
में सबसे बड़ा
असंतोष पैदा किया
है और हैरान
करने वाली बात
यह है कि
यह असंतोष केंद्र
सरकार ने पैदा
करने का काम
किया है। केंद्र
की सत्ता पर
ब्राह्मणों का नियंत्रण
प्रस्थापित करने के
लिए दो बड़े
हथियार विकसित किए जा
रहे हैं- (1) EVM और (2)धार्मिक ध्रुवीकरण
यह धार्मिक ध्रुवीकरण
हिंदू बनाम मुसलमानों
का ध्रुवीकरण है।
जिसमें ब्राह्मणों को कामयाबी
मिल रही है।
ब्राह्मणों को इसलिए
कामयाबी मिल
रही है क्योंकि
मुसलमानों को नेतृत्व
विहीन कर दिया
गया है। इस
वजह से एससी,
एसटी और ओबीसी
जिनकी जनसंख्या 74.5 प्रतिशत है
उनको हिंदू बनाने
का अभियान चल
रहा है।
CAA-2019 कानून
में भी एससी,
एसटी और ओबीसी
को कानून बनाकर
हिंदू माना गया
है और उनकी
संवैधानिक पहचान (एससी, एसटी
और ओबीसी) को
दबाने की कोशिश
की गई है
इस तरीके से
अल्पसंख्यक ब्राह्मणों को बहुसंख्यक
बनने का मौका
मिला है। मुस्लिम
आवाम को नेतृत्व
विहीन कर देने
की वजह से
ऐसा करना आसान
और संभव हो
गया है। मुसलमानों
को इस ध्रुवीकरण
के पीछे की
गहरी साजिश समझ
में नहीं आ
रही है, अगर समझ
में आई होती
तो मुस्लिम प्रतिक्रिया
नहीं करते। मगर
यह गहरी साजिश,
मुस्लिम नेतृत्व को और
मुस्लिम आवाम को
जिसे नेतृत्व विहीन
कर दिया गया
है ,समझ में
नहीं आ रही
है। इससे वे
गहरी साजिश का
शिकार होने की
संभावना बढ़ रही
6•DNA Based NRC :
2001 को DNA का रिसर्च
दुनिया के सामने
लाया गया। इस
रिसर्च के अनुसार
ब्राम्हण का DNA विदेशी पाया
गया। ब्राह्मण भी
उद्देश्य, विचार
और व्यवहार से
दिखाई देते हैं।
मगर DNA ने वैज्ञानिक
रूप से अंतिमत: प्रमाणित
किया कि ब्राह्मण
आर्य नहीं, यूरेशियन
लोग हैं ।जब
से रिसर्च आया
या सिद्ध हुआ
तब से ब्राह्मण
इसकी काट ढूंढने
में लगे हुए
थे। मगर इसमें
वे कामयाब होते
हुए दिखाई नहीं
दे रहे हैं।
(A) राखीगढ़ी का
रिसर्च: ब्राह्मणों को यह
थोड़ी आशा थी
कि राखीगढ़ी में
उनका DNA मिलेगा मगर उनका
R1A - DNA नहीं मिले इसलिए
ब्राह्मणों ने आरएसएस
द्वारा मीडिया में पब्लिक
सिटी अभियान शुरू
किया और इसके
लिए डेक्कन कॉलेज
,पूना के वसंत
शिंदे को ,जो
डीएनए एक्सपर्ट नहीं
है, उससे टीवी
पर झूठ बुलाया
गया कि आर्य
भारत के मूल
निवासी हैं और
उसके बदले में
लालच के तहत
उसको एक प्रोजेक्ट
का डायरेक्टर बनाया
गया ।इससे सिद्ध हुआ
कि वसंत शिंदे
भ्रष्टाचार के तहत
झूठ बोला। बाद
में दुनिया के
125 पुरातत्वविदों नें और
DNA एक्सपर्ट ने
मिलकर यह घोषित
किया कि राखीगढ़ी
में ब्राह्मणों का
DNA नहीं मिला और
इससे यह सिद्ध
हुआ कि ब्राह्मण
भारत के मूल
निवासी नहीं हैं।
(B) मूलनिवासियों को
विदेशी साबित करने का
षड्यंत्रकारी अभियान :
असम में जो
NRC के द्वारा के द्वारा
लिस्ट तैयार की
गई उसमें 19 लाख
लोगों को विदेशी
घोषित किया गया
। डीएनए के
अनुसार वे मूलभारतीय
हो सकते हैं,
मगर एनआरसी के
अनुसार ब्राह्मणों ने उनको
विदेशी घोषित किया। उसमें
05 लाख मुस्लिम हैं और
14 लाख से ज्यादा
एससी, एसटी
और ओबीसी के
लोग हैं 14 लाख
एससी, एसटी और
ओबीसी को भी
विदेशी घोषित करने का
षडयंत्र है ।अगर एनआरसी
को सारे देश
भर में लागू
किया जाता है
तो सारे देश
भर में एससी
एसटी और ओबीसी
को विदेशी साबित
करने की साजिश
हो सकती है
विदेशी होने का
डर पैदा करके
हिंदू बनने के
लिए मजबूर किया
जा सकता है।
हिंदू का मतलब
ब्राह्मणों का गुलाम
होता है। यह
पक्के तौर पर गुलाम
बनाने का षड्यंत्र
है ।इसलिए एससी,
एसटी और ओबीसी
के लोगों को
भी सारे देश
भर में NRC और CAA का विरोध
करना होगा ।
(C)केंद्र
सरकार को यह
करने की हिम्मत
क्यों हो रही
है ? केंद्र सरकार
को यह करने
की हिम्मत इसलिए
हो रही है क्योंकि
EVM के आधार पर
हम चुनकर आ
सकते हैं, ऐसा
उनको लगता है
। मुस्लिम लोग
NRC और CAA का जितना
विरोध कर रहे
हैं उससे 100 गुना
ज्यादा है EVM का विरोध
करना चाहिए EVM का विरोध
करने से संघ
परिवार का पूरा
बंदोबस्त कर सकते
हैं। मगर मुस्लिम
नेतृत्व को EVM के सहारे
से होने वाले
गंभीर परिणामों की
जानकारी नहीं है
और मुस्लिम आवाम
को भी जानकारी
नहीं है। जब
मुसलमान एनआरसी
और CAA का विरोध
करते हैं तो
प्रतिक्रिया मे धार्मिक
ध्रुवीकरण होता है
, जिससे संघ
परिवार को फायदा
होता है ।मुस्लिम
नेतृत्व और
मुस्लिम आवाम अगर
EVM का विरोध करते हैं
तो धार्मिक ध्रुवीकरण
नहीं होता और
संघ परिवार मजबूत
नहीं होता। इसके
लिए मुस्लिम नेतृत्व
को पहल करता
हुआ दिखाई नहीं
दे रहा है
यह हैरानी वाली
बात है ।
(D)DNA Based NRC: संघ परिवार
मूलनिवासियों को विदेशी
साबित कर लें,
इसके पहले मूल
निवासियों ने वर्तमान
NRC और CAA का विरोध
करना होगा *DNA Based NRC आन्दोलन शुरू
करना होगा इससे
जो विदेशी ब्राह्मण
है , वे सारे
देश के लोगों
के सामने खुलकर
आएंगे । क्या
करना होगा ।
इसलिए इसको देशव्यापी
आंदोलन का मुद्दा
बनाना होगा।
7• NRC औरCAA को
रोकना होगा:
इसे रोकना
होगा। इसे कैसे
रोक लगा सकते
हैं?
इसे
रोक लगाने के
लिए जो एससी,
एसटी और ओबीसी
के लोग 3000 ( तीन
हजार )साल के
मजलूम है और
मुसलमान आजाद भारत
में मजलूम है। इन
दोनों मजलूमो को
इकट्ठा आना होगा
। इकट्ठा आकर
यह लड़ाई एससी,
एसटी और ओबीसी
के नेतृत्व में
राष्ट्रीय स्तर पर
लड़नी होगी ।
यदि एससी, एसटी
और ओबीसी के
नेतृत्व मे यह
लड़ाई पहल करके
सभी मुस्लिम और
सभी अल्पसंख्यक लड़ते
हैं तो इसका
पक्का इलाज होगा
।यदि ऐसा नहीं
किया गया तो
सामूहिक आत्महत्या करने के अलावा
कोई विकल्प नहीं
रहेगा । हमें
आशा है कि
मुस्लिम और सभी
अल्पसंख्यांक लोग सामूहिक
आत्महत्या करने का
रास्ता नहीं अपनाएगें।
धर्मनिरपेक्षता
के नाम पर
मुसलमान और सभी अल्पसंख्यांको
ने यदि जालिमों का साथ
दिया तो सामूहिक
आत्महत्या होगी और
धार्मिक ध्रुवीकरण का साथ
दिया तो ब्राह्मणों
की गुलामी स्वीकार
करनी होगी ।इसलिए
इसका विरोध करना
जरूरी है और
राष्ट्रीय स्तर पर
विरोध करना जरूरी
है। स्थानिक स्तर
पर कुछ मुसलमान
अपनी नेतागिरी चमकाने
की कोशिश कर
सकते हैं और
मुसलमानों को खतरे
में डाल सकते
हैं इसलिए मुस्लिम
आवाम को सावधान
रहना होगा ।मुस्लिम
और सभी अल्पसंख्यक
लोगों को यह
लड़ाई एससी
,एसटी और ओबीसी के
नेतृत्व में लड़नी होगी
।
बहुजन
क्रांति मोर्चा को
बहुजन
मुक्ति पार्टी का जाहिर
समर्थन एवं सहभाग
हरिकेश
गौतम
जिला
अध्यक्ष -बहुजन मुक्ति पार्टी
प्रतापगढ उ0प्र0
विधानसभा
पूर्व प्रत्याशी, लोक
सभा प्रभारी प्रतापगढ
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