जिस
विधायक का सामाजिक
संगठनो ने विधायक
बनने से पहले
सामाजिक बहिष्कार करने का
षड्यंत्र किया था
असल मे आज
वही विधायक विधानसभा
मे पहुँचकर आदिवासियों
के हित मे
नीतियाँ बनाने के लिए
सरकार को मजबूर
कर रहा है
वास्तव मे आदिवासियों
के असली शुभचिंतको
को हमारा समाज
पहचान ही नहीं
पाया है जो
नेतृत्व समाज को
बेचने पर उतारू
है उनको हमारा
समाज पलकों पे
बिठाये हुये है
और जो सही
मायने मे समाज
को सही दिशा
देने का प्रयास
कर रहे है
उन्हें समाज बहिष्कार
करता है यह
सब एक कूटनीतिक
चाल है जिसे
आज के पड़े
लिखें युवाओं को
समझना होगा आज
मध्यप्रदेश की खनन
नीति का सिर्फ
एक मात्र विधायक
जयस के राष्ट्रीय
संरक्षक ने खुलकर
विरोध किया था
और मांग की
थी 89 ट्राइबल ब्लाकों
मे आदिवासी युवाओ
के समूह को
रेत खदाने मिलनी
चाहिए और इस
बात को पुरजोर
तरीके से आदिवासी
मंत्रणा परिषद मे भी
रखा था जिसका
परिणाम सरकार आदिवासी ब्लाकों
मे नई नीति
बनाने की दिशा
मे आगे बढ़ रही
है यह समस्त
जयस की और
विशेषकर उन जयस
युवाओं की जीत
है जिन्होंने हमेशा
इस संघर्ष मे
डॉ अलावा का
साथ दिया जिसकी
बदौलत ये नया
नवेला विधायक डंके
की चोट पर
कतार की आखिरी
पंक्ति के लिए
अपने आक्रामक वैधानिक
अंदाज में कीर्तिमान
स्थापित करता जा
रहा है।प्यारे युवाओं
और समाज के
बुद्धिजीवी साथियों हमें ऐसे
ही संवैधानिक समझ
वाले जोशीले युवा
नेतृत्व को समाज
मे आगे लाना
और 70 सालों के
गूंगे,बहरे, खामोश
व पार्टियों के
गुलाम नेतृत्व को
अब डंके की
चोट डॉ अलावा
जैसे जुनूनी व
लगनशील नेतृत्व से विस्थापित
करना होगा।तभी हम
समाज की तस्वीर
व तकदीर बदलने
के सपने को
हकीकत में साकार
कर पाएंगे।
जय
जयस जय आदिवासी
जय भीम👏👏
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