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Sunday, January 12, 2020

सोशल जस्टिस लीगल सेल टीम छत्तीसगढ़


सोशल जस्टिस लीगल सेल टीम छत्तीसगढ़
सरपंच का चुनाव महज एक पद का चुनाव नही है। यह चुनाव हैं गाँव के आगामी 5 सालो के भविष्य का। लोकतंत्र की सबसे निचली कड़ी लेकिन एक गाँव के लिए उसके आने वाले 5 साल तय करने वाला चुनाव है। इस चुनाव में आपसी  मतभेद भुलाकर ऐसे व्यक्ति को चुने जो 5 साल आपके साथ खडा होने का भरोसा पात्र हो, जोशीला हो, ईमानदार हो, समाज में उसकी छवि अच्छी हो और जो सरकारी महकमो में अच्छी तरह बोल सके और गाँव का विकास करवा सके।। सरपंचनहीगाँवकाभविष्य_है। हमारी ग्राम पंचायत एक "आदर्श ग्राम पंचायत" बने। किसी हमसाथी, आपके साथ गले लगकर मिलने वाले, जिसके साथ आप किसी समय भी अपनी समस्या लेकर जाये तो वो आप के साथ कन्धा से कन्धा मिलाकर खड़ा रहे, इमानदार और अच्छे उम्मीदावार को ही चुने ओर आपकी ग्राम पंचायत किसी अच्छे उम्मीदवार के हाथो में ही जाये यह हम सभी का कर्तव्य है।।..

अबकी बार आदिवासी सरकार' के नारे पर सवार कांग्रेस ने 2018 के आमचुनाव के बाद मध्यप्रदेश में जहां आदिवासियों की 22.50% जनसंख्या हैं वहां 47 आदिवासियों के लिए आरक्षित विधानसभा क्षेत्र में 31विधानसभा सीट निकाल ली। 9अगस्त 2019 को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री ने भी छिंदवाड़ा में आयोजित कार्यक्रम में बड़े जोशो-खरोश के साथ आदिवासियों के द्वारा साहूकारों से लिए हुए कर्जे को माफ़ करनें की घोषणा करके सोने पर सुहागा वाली कहावत को पूरे मध्यप्रदेश में मानसून की बारिश भी भांति बिखेर दिया था।लेकिन सच्चाई तो अब धीरे-धीरे समझ में रहा है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री जिन सूदखोरों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात करते हैं उन्हीं सूदखोरों के साथ अंदरखाने में बैठक भी करते हैं। दैनिक समाचार पत्र गोंडवाना समय को मैं धन्यवाद प्रेषित करता हूं कि उन्होंने सिवनी जिले के सूदखोरों के बारे में प्रमुखता से छापकर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री की कथनी और करनी को उजागर किया है। अब लगता है कि जिस तरीके से पूरे देश की मीडिया मोदी जी के इशारे पर चलती हैं ठीक उसी तरह मध्य प्रदेश की मीडिया भी साहूकारों,पूंजीपतियों के इशारे पर अपना कार्य करके पूंजिपतियों और मध्य प्रदेश सरकार की भक्ति में तल्लीन हैं। माननीय मुख्यमंत्री जी के घोषणा के बावजूद भी सिवनी जिले से इतना बड़ा खुलासा होने के बावजूद भी ट्राइबल मिनिस्टर माननीय ओमकार मरकाम जी के मुंह में दही जम जाना कहीं ना कहीं मध्य प्रदेश सरकार और साहूकारों के गठजोड़ को ही सिद्ध करता हैं...... भाई साहब , डाक्टर हीरालाल अलावा जी की दहाड़ से ही सरकार घबरा कर आज आदिवासियो के देवी देवालय आदिवासियो की सरक्षण के लिये योजनाओं को लागू करने में लगी हुई है , डाक्टर अलावा साहब दहाड़े होते तो आज भी सरकार आदिवासियो की ताकत को पहचान पाती ,  15 साल बी .जे .पी .की सरकार रही तो है कुछ नही हुआ , अभी सरकार को 1साल हुये हैं अभी चार साल और है इन चार साल में डाक्टर अलावा साहब सरकार को अकेले हिला के रख देंगे देखते जाइये , पेसा कानून की लड़ाई अलावा जी अकेले विधान सभा में उठा रहे हैं और इसे लागू करा के रहेंगे देखते जाइयेगा , आपके तीन विधायक थे कभी पेसा कानून के बारे में चर्चा तक नही किये , अभी तो ट्रेलर है पिक्चर अभी बाकी है , जोहार

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