अगर
जूते बनाने वाली कंपनियां जूतों के भाव तय कर सकती हैं , मोबाइल, फोन, कार, मोटरसाइकिल,
कोलगेट, साबुन, सीमेंट, ईंट, बर्तन आदि के भाव कंपनियां खुद तय कर
सकती है
तो
किसान अपनी फसल के भाव खुद तय नहीं कर सकता क्यों?
"अगर किसान खुद अपनी फसल के भाव तय करें
तो भारत से गरीबी मिट सकती है क्या ?"अगर
इससे आप
सहमत है तो इस मैसेज को आगे से आगे शेयर करें ताकि किसान भी अपनी फसल के
भाव खुद तय कर सके
*मिशन*
जय
हिंद
जय
भारत
जय
छत्तीसगढ़ जय मध्यप्रदेश
जय
जवान जय किसान

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