यहाँ दीवाली 2025 के बारे में पूरी जानकारी हिंदी में दी गई है
दीवाली 2025 की जानकारी (Diwali 2025 Information in Hindi)
1-त्योहार का नाम: दीपावली / दीवाली /
लक्ष्मी पूजा
2-तारीख: सोमवार, 20 अक्टूबर 2025
3-दिन: सोमवार
दीवाली, जिसे प्रकाश का त्योहार कहा जाता है, भारत का सबसे प्रमुख और हर्षोल्लास से मनाया जाने वाला पर्व है। यह
त्योहार अंधकार पर प्रकाश,
अज्ञान पर ज्ञान और बुराई पर अच्छाई की
विजय का प्रतीक है।
दीवाली मनाने का कारण-
दीवाली भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने
की खुशी में मनाई जाती है। इस दिन अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण का स्वागत किया
था।
लक्ष्मी पूजा का महत्व-
दीवाली की रात को मां लक्ष्मी और भगवान
गणेश की पूजा की जाती है। माना जाता है कि इस दिन लक्ष्मी जी घर में समृद्धि, धन और सौभाग्य का वास करती हैं।
पूजा मुहूर्त (20 अक्टूबर 2025):
लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 6:41 बजे से रात 8:15 बजे तक (लगभग)
प्रदोष काल: शाम 6:14 बजे से रात 8:50 बजे तक
(मुहूर्त स्थान के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है)
दीवाली के पाँच दिन-
1. धनतेरस – 17 अक्टूबर 2025
2.नरक चतुर्दशी (छोटी दीवाली) – 18 अक्टूबर 2025
3. दीपावली (लक्ष्मी पूजा) – 20 अक्टूबर 2025
4. गोवर्धन पूजा – 21 अक्टूबर 2025
5.भाई दूज – 22 अक्टूबर 2025
दीवाली की परंपराएँ
1.
घरों की सफाई और सजावट की जाती है।
2.
दीये और मोमबत्तियाँ जलाकर घर को रोशन किया जाता है।
3.
मिठाइयाँ और उपहारों का आदान-प्रदान होता है।
4.
पटाखे फोड़े जाते हैं (पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए संयमित रूप
में)।
5.
लक्ष्मी-गणेश की पूजा की जाती है।
भारत में दीवाली का महत्व
दीवाली, जिसे “दीपावली” भी कहा जाता है, भारत का सबसे प्रमुख और पवित्र त्योहार
है। यह त्योहार अंधकार पर प्रकाश की, असत्य पर सत्य की, और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक
है। दीवाली का उत्सव हर साल कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है।
दीवाली का धार्मिक महत्व
दीवाली से कई धार्मिक कथाएँ जुड़ी हैं —
1. भगवान राम की वापसी:
सबसे प्रसिद्ध कथा के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीराम 14 वर्ष के वनवास
के बाद लंका पर विजय प्राप्त कर अयोध्या लौटे थे। अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर
उनका स्वागत किया था। इसलिए इसे “दीपों का पर्व” कहा जाता है।
2. माता लक्ष्मी की पूजा:
दीवाली की रात माता लक्ष्मी, जो धन और समृद्धि की देवी हैं, की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है
कि इस दिन लक्ष्मी जी घर-घर भ्रमण करती हैं और स्वच्छ, उजले घरों में निवास करती हैं।
3. भगवान विष्णु और लक्ष्मी विवाह:
एक कथा के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का विवाह हुआ था, इसलिए यह दिन शुभ माना जाता है।
4. गुरु हरगोबिंद सिंह जी की जेल से
मुक्ति:
सिख धर्म में दीवाली को “बंदी छोड़ दिवस” के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि इस दिन गुरु हरगोबिंद सिंह जी
ने 52 राजाओं को कैद से मुक्त कराया था।
5. जैन धर्म में:-
जैन धर्म के अनुयायी इस दिन को भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में मनाते हैं।
दीवाली का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
* यह त्योहार खुशियों, मेल-मिलाप और एकता का प्रतीक है।
* लोग अपने घरों की सफाई, सजावट और दीपों से रोशनी करते हैं।
* परिवार और मित्रों के बीच मिठाइयाँ
और उपहारों का आदान-प्रदान होता है।
* व्यापारी वर्ग के लिए यह नववर्ष की
शुरुआत का भी प्रतीक है।
निष्कर्ष
दीवाली केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक उत्सव
है, जो
हमें यह सिखाता है कि जीवन में प्रकाश, सत्य और सदाचार का मार्ग अपनाना चाहिए।
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में (100 शब्दों में) लिख दूँ या निबंध के रूप में (250–300 शब्दों में) तैयार कर दूँ?



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