दीवाली पर दीया जलाते त्योहार | दिनांक | तिथि और समय | - jagoindia Sarkari Yojana : नई सरकारी योजना 2025

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Wednesday, October 8, 2025

दीवाली पर दीया जलाते त्योहार | दिनांक | तिथि और समय |

 

दीवाली पर दीया जलाते समय आप मिट्टी के दीये को तरजीह दे सकते हैं, और विभिन्न प्रकार के तेल या घी का चुनाव अपनी विशेष जरूरतों के आधार पर कर सकते हैं। क्या आप दिवाली पर्व से जुड़े किसी और पहलू, जैसे लक्ष्मी पूजन की विधि, के बारे में और जानना चाहेंगे?



2025 में, दिवाली 20 अक्टूबर को और गोवर्धन पूजा 22 अक्टूबर को मनाई जाएगी। नीचे दी गई तालिका में इन त्योहारों की तिथियों और शुभ मुहूर्तों का विवरण दिया गया है:

 

| त्योहार | दिनांक | तिथि और समय |

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| दिवाली (लक्ष्मी पूजा) | सोमवार, 20 अक्टूबर 2025 | अमावस्या तिथि: 20 अक्टूबर, दोपहर 03:44 बजे से - 21 अक्टूबर, शाम 05:54 बजे तक |

| गोवर्धन पूजा | बुधवार, 22 अक्टूबर 2025 | प्रतिपदा तिथि: 21 अक्टूबर, शाम 05:54 बजे से - 22 अक्टूबर, रात 08:16 बजे तक |

 

गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त

गोवर्धन पूजा करने के लिए विशेष रूप से निर्धारित शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:

- सुबह का मुहूर्त**: 06:26 AM से 08:42 AM तक

- शाम का मुहूर्त**: 03:29 PM से 05:44 PM तक

गोवर्धन पूजा का महत्व और तरीका

गोवर्धन पूजा, जिसे अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है, भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत को उठाकर ब्रजवासियों को इंद्रदेव के क्रोध से बचाने की घटना की याद में मनाई जाती है। यह त्योहार प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और सामुदायिक एकता का संदेश देता है।

पूजा की मुख्य विधियाँ इस प्रकार हैं:

- गोवर्धन की प्रतिमा बनाना: गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की प्रतिमा बनाएं और उसे फूलों से सजाएं।

- पूजन सामग्री अर्पित करना: प्रतिमा पर जल, फल, धूप, दीप और 56 प्रकार के शाकाहारी व्यंजन (छप्पन भोग)** का भोग लगाएं।

- परिक्रमा और आरती: गोवर्धन की प्रतिमा की परिक्रमा करें और आखिर में आरती करके प्रसाद सभी में बांटें।

क्या आप दिवाली पर्व से जुड़े किसी और पहलू, जैसे लक्ष्मी पूजन की विधि, के बारे में और जानना चाहेंगे?

दीवाली पर दीया जलाते समय आप मिट्टी के दीये को तरजीह दे सकते हैं, और विभिन्न प्रकार के तेल या घी का चुनाव अपनी विशेष जरूरतों के आधार पर कर सकते हैं। नीचे दी गई तालिका आपको यह चयन करने में मदद करेगी।

 

| दीपक / तेल का प्रकार |मुख्य उद्देश्य / लाभ | संबंधित देवता |

| :--- | :--- | :--- |

| गाय के घी का दीपक | आर्थिक तंगी दूर करना, मां लक्ष्मी को प्रसन्न करना, घर में सुख-समृद्धि लाना | देवी लक्ष्मी |

| सरसों के तेल का दीपक | शनि ग्रह को मजबूत कर कष्ट दूर करना, शत्रुओं से रक्षा करना | भैरव बाबा, सूर्य देव |

| तिल के तेल का दीपक | शनि ग्रह की कृपा प्राप्त करना और उनके प्रभाव से मुक्ति पाना | - |

| महुए के तेल का दीपक | मनोकामना पूर्ति और पति की लंबी आयु के लिए | - |

|आटे का दीपक | किसी भी प्रकार की साधना और सिद्धि के लिए सर्वोत्तम | - |

|विशेष आकृतियों वाले दीपक | | |

| तीन मुखी दीपक | संकट से मुक्ति पाने के लिए | हनुमान जी |

| पंचमुखी दीपक | अदालती मामलों में जीत प्राप्त करने के लिए | भगवान कार्तिकेय |

| सात मुखी दीपक | माता लक्ष्मी की कृपा बनाए रखने के लिए | देवी लक्ष्मी |

 

दीपक जलाने के व्यावहारिक सुझाव

दीपक के चयन और उपयोग से जुड़े कुछ व्यावहारिक सुझाव इस प्रकार हैं:

 

- दीपक जलाने की सही विधि:- दीपक जलाने की शुरुआत घर के मंदिर से करें। शाम को सूर्यास्त के बाद, प्रदोष काल में दीप जलाना सबसे शुभ माना जाता है। दीपक जलाते समय दिशाओं का ध्यान रखें; पूर्व दिशा में दीपक रखने से स्वास्थ्य और शांति मिलती है, जबकि उत्तर दिशा में दीपक रखने से समृद्धि आती है।

 

- दीपक जलाने के महत्वपूर्ण स्थान: कुछ खास स्थानों पर दीपक जलाना विशेष फलदायी माना गया है:

    - घर का मुख्य द्वार: सकारात्मक ऊर्जा और लक्ष्मी के स्वागत के लिए।

    - तुलसी का पौधा: मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति के लिए।

    - रसोईघर: अच्छे स्वास्थ्य और अन्न की प्रचुरता के लिए।

    - पूजा स्थल: देवी-देवताओं का आशीर्वाद पाने के लिए।

- दीपक की संख्या: शुभ कार्यों में विषम संख्या में दीपक जलाने की परंपरा है, जैसे 5, 7, 9, 11, 51 या 101 दिवाली पर कम से कम 5 दीपक जलाने का सुझाव दिया जाता है।

आध्यात्मिक दृष्टिकोण

 

दीपावली का त्योहार केवल बाहरी रोशनी का ही नहीं, बल्कि आंतरिक प्रकाश का भी प्रतीक है। जिस प्रकार बाहर का दीपक एक दिन बुझ जाता है, उसी प्रकार यह शरीर रूपी दीपक भी नश्वर है। असली दीपावली तब होती है जब हम अपने अंदर के अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करने के लिए ज्ञान का दीपक जलाते हैं।

दीवाली की शुभकामनाएं! क्या दीपक जलाने से जुड़ी कोई और बात जानना चाहेंगे, जैसे कि विशेष मंत्र या पूजा की विधि?

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