प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि योजना - jagoindia Sarkari Yojana : नई सरकारी योजना 2025

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Wednesday, December 20, 2023

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि योजना

 प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि योजना




उत्पत्तिः

ब्यूरो ऑफ फार्मा पीएसयूज ऑफ इण्डिया (BPPI-Bureau of Pharma PSUs of India)

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केन्द्र खोलने हेतु आवश्यक मापदण्ड:-

प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केन्द्र खोलने हेतु आवश्यक नियम व शर्ते

लाइसेंस निर्गमन

जेनेरिक औषधियों के विक्रय को प्रोत्साहन दिये जाने के संबंध में दिशा-निर्देश:

योजना का लाभ

संबंधित संसाधन

जेनेरिक औषधियों को लोकप्रिय बनाये जाने के संबंध में प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना




उत्पत्तिः

बाजार में फुटकर ब्राण्डेड औषधियों का मूल्य, जेनेरिक औषधियों के मूल्यों की तुलना में बहुत अधिक है जबकि एक ही औषधि जो बाजार में ब्राण्डेड एवं जेनेरिक रूप में उपलब्ध है, उसकी थेराप्यूटिक वैल्यू में कोई अन्तर नहीं होता है। भारत वर्ष का एक बड़ा वर्ग आज भी गरीबी रेखा के नीचे है, ऐसी स्थिति में गुणवत्तापरक जेनेरिक औषधियों से इस वर्ग को बहुत अधिक लाभ मिल सकता है। इस उद्देश्य के दृष्टिगत फार्मा एडवाजरी फोरम द्वारा दिनांक 23.04.2008 को निर्णय लिया गया कि पूरे भारत वर्ष के प्रत्येक 630 जनपदों में जेनेरिक औषधियों के स्टोर्स खोले जाए जिनका नाम "प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केन्द्र' रखा जाए।


ब्यूरो ऑफ फार्मा पीएसयूज ऑफ इण्डिया (BPPI-Bureau of Pharma PSUs of India)

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केन्द्र को क्रियान्वित किये जाने के दृष्टिगत बीपीपीआई का गठन दिसम्बर, 2008 में भारत सरकार द्वारा किया गया । निम्नवत् कार्यों हेतु बीपीपीआई का गठन किया गया-


गुणवत्तापरक जेनेरिक औषधियों का उचित मूल्यों पर निर्माण किया जाना तथा जनऔषधि केन्द्र खोले जाने वाले आवेदक को सप्लाई चेन के माध्यम से गुणवत्तापरक जेनेरिक औषधियां उपलब्ध कराया जाना।

जेनेरिक औषधियों का प्रधानमंत्री जनऔषधि केन्द्र के माध्यम से विपणन किया जाना।

Central Pharma PSUs एवं निजी निर्माताओं से जेनेरिक औषधियों का प्रबन्ध किया जाना ।

प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधियों केन्द्र को सुचारू रूप से चलाये जाने हेतु अनुश्रवण करना ।

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केन्द्र खोलने हेतु आवश्यक मापदण्ड:-

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केन्द्र खोले जाने हेतु कोई भी व्यक्ति जिसके पास बी0फार्मा/डी० फार्मा की शैक्षिक योग्यता है अथवा ऐसा व्यक्ति जिसके द्वारा बी०फार्म व डी० फार्म शैक्षिक योग्यता के व्यक्ति को रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट के रूप में नियुक्त किया गया है, आवेदन कर सकता है। सम्मानित एन०जी०ओ० तथा कोई भी चैरिटेबल संगठन भी रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट को नियुक्त कर आवेदन दे सकता है । प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केन्द्र खोलने हेतु आवश्यक अभिलेख-


प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केन्द्र खोले जाने हेतु आवेदक को कम से कम 120 वर्गफीट क्षेत्र की आवश्यकता होती है जिसे वह किराये पर लीज पर भी ले सकता है। इस संबंध में बी०पी०पी०आई० द्वारा कोई सहायता प्रदान नहीं की जाती है।

रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट का नाम, रजिस्ट्रेशन सम्बन्धी अभिलेखों के साक्ष्य |

यदि आवेदक एस०सी० / एस०टी० या विकलांग है तो इस संबंध में आवश्यक साक्ष्य |

प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केन्द्र खोलने हेतु आवश्यक नियम व शर्ते

प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केन्द्र खोले जाने हेतु आवेदक को बी०पी०पी०आई० के साथ एक करार किया जाना होगा।

आवेदक को प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केन्द्र के नाम से ही आवेदन करना होगा।

आवेदक द्वारा स्वयं की अथवा लीज / किराये पर लिये गये स्थान जिस हेतु आवेदक द्वारा अभिलेख प्रस्तुत किये गये है, पर ही औषधि विक्रय लाइसेंस हेतु आवेदन किया जाना होगा।

आवेदक द्वारा विक्रय की गयी औषधियों के बीजक बी०पी०पी०आई० द्वारा ही उपलब्ध कराये गये साफ्टवेयर की मदद से प्रिन्ट किया जाना होगा।

आवेदक द्वारा ब्राण्डेड औषधियों को विक्रय करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

लाइसेंस निर्गमन

आवेदक के अभिलेखों को औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 एवं तत्सम्बन्धी नियमावली, 1945 के अंतर्गत लाइसेंस निर्गमन हेतु सम्बन्धित जनपद के औषधि निरीक्षक को आवेदन अग्रसारित कर दिया जाता है जिसका परीक्षण औषधि निरीक्षक द्वारा किया जाता है। परीक्षणोपरान्त समस्त अभिलेख उपयुक्त पाये जाने पर आवेदन शुल्क आवेदक द्वारा जमा कराया जाता है । औषधि निरीक्षक की आख्या पर सम्बन्धित औषधि अनुज्ञापन प्राधिकारी (विक्रय ) द्वारा लाइसेंस निर्गत किया जाता है तथा इसकी सूचना बी०पी०पी०आई० को दे दी जाती है।


प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केन्द्र खोलने वाले आवेदक (निजी / फार्मासिस्ट / एन०जी०ओ०/ चैरिटेबल संगठन) जो बी०पी०पी०आई० मुख्यालय से इन्टरनेट के माध्यम से जुड़ा है, को रू0 2.5 लाख तक लाभ दिया जाता है। यह लाभ मासिक विक्रय का 15 प्रतिशत (अधिकतम रू0 10,000 प्रतिमाह परन्तु रू० 2.5 लाख सीमा तक ) के रूप में दिया जाता है। गरीब / एस०सी० / एस0टी0 अथवा विकलांग आवेदक को उपांकित लाभ के अतिरिक्त रू0 50,000/- की औषधियां अग्रिम रूप से दी जाती है।


जेनेरिक औषधियों के विक्रय को प्रोत्साहन दिये जाने के संबंध में दिशा-निर्देश:

जेनेरिक औषधियों के विक्रय को प्रोत्साहन दिये जाने के संबंध में यह आवश्यक है कि समस्त रजिस्टर्ड मेडिकल प्रेक्टिसनर्स अपने मरीजों को जांच के उपरान्त अपने पर्चे पर केवल जेनेरिक औषधियों को ही लिखे। इस संबंध में समय-समय पर भारत सरकार द्वारा भी रजिस्टर्ड मेडिकल प्रेक्टिसनर्स व प्राइवेट मेडिकल प्रेक्टिसनर्स को दिशा-निर्देश दिये जाते रहे हैं ।

सभी मेडिकल कालेज के अन्दर जेनेरिक औषधि भण्डार ही खोले जाए।

मेडिकल स्टोर्स पर अधिक से अधिक जेनेरिक औषधियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए । एन0जी0ओ0 तथा चैरिटेबल संगठन की मदद से जेनेरिक औषधियों के संबंध में जागरूकता अभियान चलाये जाए ।

योजना का लाभ

सरकार ने कहा है कि प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना से पिछले आठ वर्ष के दौरान दवाईयों के खर्च में आम जनता को तकरीबन 18 हजार करोड़ रूपये की बचत हुई है। चालू वित्त वर्ष में इस योजना के अंतर्गत सात सौ 58 करोड़ रुपये की दवाईयां बेची गई हैं। इससे लोगों को लगभग चार हजार पांच सौ करोड़ रूपये की बचत हुई है। इस योजना की शुरूआत सस्ती कीमतों पर सभी को गुणवत्ता पूर्ण जेनेरिक दवा उपलब्ध कराने के लिए की गई है। रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने कहा है कि देश के सात सौ 43 जिलों में अभी तक नौ हजार से अधिक जन औषधि केन्द्र खोले गए हैं। सरकार ने मार्च 2025 तक देशभर में दस हजार जन औषधि केन्द्र खोलने का लक्ष्य निर्धारित किया है। 


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