5-प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना (पीएमएजीवाई) प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना What is Pradhan Mantri Adarsh Gram Yojana
इस पृष्ठ में अनुसूचित जाति कल्याण से सम्बंधित प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना (पीएमएजीवाई) के विषय में पूछे जाने वाले प्रश्नों का संकलन किया गया है।
प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना (पीएमएजीवाई) प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना
प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना (पीएमएजीवाई) का उद्देश्य क्या है?
पीएमएजीवाई योजना के मुख्य घटक क्या हैं?
इस योजना को कार्यान्वित करने की कार्य पद्धति और मुख्य कार्यकर्त्ताओं को प्रशिक्षण देने की क्या व्यवस्था है?
गांवों की पहचान किस तरह की जाती है?
प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना (पीएमएजीवाई) का उद्देश्य क्या है?
प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना (पीएमएजीवाई) का उद्देश्य 50% से अधिक अनुसूचित जाति जनसंख्या वाले चुनिंदा गांवों का एकीकृत विकास सुनिश्चित करना है ताकि उन्हें ''आदर्श गांव'' बनाया जा सके और वहां निम्नलिखित सुविधाएं उपलब्ध हों :-
गांवों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए वहां अपेक्षित सभी भौतिक सुविधाएं एवं सामाजिक अवसंरचना हो, जो अधिकतम संभव सीमा तक इस योजना के पैरा 2.1 में उल्लिखित मानदंडों के अनुरूप हो।
अनुसूचित जाति और गैर-अनुसूचित जाति जनसंख्या के बीच सामान्य सामाजिक-आर्थिक संदर्भ में (उदाहरणार्थ, साक्षरता दर, प्रारंभिक शिक्षा की पूर्णता दर, आईएमआर/एमएमआर, उत्पादक संपत्तियों का स्वामित्व, आदि के संदर्भ में) असमानता समाप्त हो और ये संकेतक कम से कम राष्ट्रीय औसत तक बढ़ाए जाएं; और
अनुसूचित जातियों के प्रति अस्पृश्यता, भेदभाव, पृथक्कीकरण और अत्याचार समाप्त हो और अन्य सामाजिक बुराइयां भी समाप्त हों जैसे लड़कियों/महिलाओं में भेदभाव, मद्यपान और नशीले पदार्थों (दवा) का दुरुपयोग, आदि तथा समाज के सभी वर्ग स्वाभिमान से एवं समानता पूर्वक रहें तथा सभी वर्गों में परस्पर सौहार्दता रहे।
पीएमएजीवाई योजना के मुख्य घटक क्या हैं?
इस योजना के दो मुख्य संघटक हैं :-
टेरिटोरियल क्षेत्र I – I संबंधित संघटक
कार्यात्मक क्षेत्र I – I संबंधित संघटक
1.1 योजना का पहला संघटक टेरिटोरियल स्वरूप का है और अलग-अलग गांवों पर केन्द्रित है तथा उसके दो उप-संघटक हैं;
चुनिंदा गांवों में केन्द्र और राज्य सरकारों की मौजूदा योजनाओं का कनवर्जेंट कार्यान्वयन, और
पीएमएजीवाई से अंतर-पाटन (गैप-फिलिंग) धनराशि, जिसमें केन्द्र सरकार का अंशदान 20.00 लाख रुपए प्रति गांव की औसत दर से होगा (जिसमें राज्य सरकार उचित, तरजीही तौर पर बराबर का अंशदान करेगी) ताकि चुनिंदा गांवों की पहचानशुदा विकासात्मक आवश्यकताओं की विशेष रूप से पूर्ति की जा सके, जिसकी पूर्ति केन्द्रीय और राज्य सरकारों की मौजूदा योजनाओं के तहत नहीं की जा सकती है।
1.2 कार्यात्मक क्षेत्र संबंधित संघटक का, अन्य बातों के साथ-साथ, आशय यह है कि प्रशासनिक तंत्र-व्यवस्था को सुदृढ़ बना कर इस योजना के कार्यान्वयन को सुकर बनाया जाए ताकि इस संघटक की योजना बनाकर उसे कार्यान्वित किया जाए, मुख्य कार्मिकों की क्षमता का निर्माण किया जाए, समुचित प्रबंधन सूचना प्रणाली का विकास किया जाए, आदि।
इस संघटक के लिए, राज्य सरकार टेरिटोरियल क्षेत्र संबंधित संघटक हेतु परिव्यय के 5% तक केन्द्रीय सहायता की पात्र होगी, जिसका 1% राज्य सरकारों को तकनीकी संसाधन सहायता और बेसलाइन सर्वेक्षण के लिए पहले ही जारी कर दिया गया है।
इस योजना को कार्यान्वित करने की कार्य पद्धति और मुख्य कार्यकर्त्ताओं को प्रशिक्षण देने की क्या व्यवस्था है?
योजना का कार्यान्वयन राज्य सरकारों द्वारा किया जाएगा। योजना के समग्र मार्ग-निर्देश और निगरानी के लिए, ग्रामीण विकास और सामाजिक न्याय के प्रभारी मंत्रियों की सह-अध्यक्षता में राज्य स्तर पर एक सलाहकार समिति गठित करनी होगी। इसके अलावा, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय संचालन एवं निगरानी समिति (एसएसएमसी) गठित करने की आवश्यकता होगी ताकि योजना के कार्यान्वयन की निगरानी की जा सके। एसएसएमसी का सदस्य सचिव राज्य कार्यक्रम निदेशक, पीएमएजीवाई के रूप में काम करेगा। इसी प्रकार, राज्य सरकार को जिला और ब्लॉक स्तरों पर इस योजना के कार्यक्रम निदेशक को नामजद करने की आवश्यकता होगी। कार्यक्रम निदेशक अपने-अपने स्तरों पर पीएमएजीवाई के लिए मुख्य कार्यपालक के रूप में काम करेंगे।
इस योजना (i) बेसलाइन सर्वेक्षण और (ii) ग्रामीण विकास योजना के सफल कार्यान्वयन के लिए, विभिन्न स्तरों पर प्रमुख कार्यकर्त्ताओं को आवश्यक ओरिएंटेशन तथा प्रशिक्षण प्रदान करने की आवश्यकता होगी। राज्य स्तरीय कार्यकर्त्ताओं और राज्य स्तरीय तकनीकी संसाधन सहायता (टीआरएस) संस्थान के लिए प्रशिक्षण का आयोजन केन्द्र सरकार द्वारा शीघ्र ही किया जाएगा। इसके बाद, राज्य जिला स्तरों के टीआरएस संस्थानों से, इस कार्य की अपेक्षा, निचले स्तरों पर की जाएगी।
गांवों की पहचान किस तरह की जाती है?
राज्य सरकार से यह अपेक्षा की जाति है कि वह केवल एक जिले से, यथा-संभव, पाइलट फेज में कवर की जाने वाली 50% से अधिक अनुसूचित जाति जनसंख्या वाले गांवों की अपेक्षित संख्या का पता लगाए ताकि उन पर ध्यान केन्द्रित किया जा सके। तथापि, यदि राज्य आवश्यक समझता है, तो वह पर्याप्त कारणों सहित, दो या अधिकतम तीन समीपवर्ती जिलों से गांवों का चयन कर सकता है।
6-बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना (बीजेआरसीवाई)
इस पृष्ठ में अनुसूचित जाति कल्याण से सम्बंधित बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना (बीजेआरसीवाई) के विषय में पूछे जाने वाले प्रश्नों का संकलन किया गया है।
बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना (बीजेआरसीवाई)
इस योजना के अंतर्गत कार्यान्वयनकारी एजेंसी कौन हैं?
इन कार्यान्वयनकारी एजेंसियों की पात्रता क्या है?
क्या गैर-सरकारी संगठन/मानित विश्वविद्यालय नए छात्रावास भवनों का निर्माण करने के पात्र हैं?
क्या होस्टलों अनुरक्षण भारत सरकार की जिम्मेदारी है?
इस योजना के तहत निर्मित छात्रावासों के अनुरक्षण के लिए कौन जिम्मेदार है?
छात्रावासों में छात्रों की संख्या कितनी होनी चाहिए?
इस योजना के तहत किस प्रकार का आवास प्रदान किया जाता है?
वित्त-पोषण की पद्धति क्या है?
यदि कोई राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन किसी गैर-सरकारी संगठन/मानित विश्वविद्यालय को अपना अंशदान नहीं देता है, तो उस स्थिति में क्या होता है?
सहायता अनुदान किसे जारी किया जाता है?
कार्यान्वयन एजेंसियों को सहायता अनुदान किस तरह जारी किया जाता है?
गैर-सरकारी संगठनों/मानित विश्वविद्यालयों को दूसरी किस्त जारी करने की अपेक्षाएं क्या हैं?
इस योजना के अंतर्गत अन्य लाभ क्या हैं?
क्या गैर-सरकारी संगठन/मानित विश्वविद्यालय मंत्रालय को सीधे अपने प्रस्ताव प्रस्तुत करते हैं?
क्या राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन की सिफारिश आवश्यक है?
छात्रावासों का निर्माण करने की समय-सीमा क्या है?
क्या इस योजना के अंतर्गत कोई वार्षिक पारिवारिक आय सीमा निर्धारित की गई है?
क्या विद्यार्थियों को कोई प्राथमिकता दी जाति है?
क्या इस योजना के अंतर्गत निधियों का राज्य-वार आवंटन किया जाता है?
कृपया पिछले तीन वर्षों के दौरान आवंटित की गई निधियों, जारी की गई निधियों, संस्वीकृत किए गए छात्रावासों और लाभार्थियों का ब्यौरा दें?
इस योजना को अंतिम बार कब संशोधित किया गया था?
इस योजना के अंतर्गत कार्यान्वयनकारी एजेंसी कौन हैं?
कार्यान्वयन एजेंसियां निम्नलिखित हैं :-
राज्य सरकारें
संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन
केन्द्रीय विश्वविद्यालय/संस्थान
राज्य विश्वविद्यालय/संस्थान
गैर-सरकारी संगठन/मानित विश्वविद्यालय
इन कार्यान्वयनकारी एजेंसियों की पात्रता क्या है?
राज्य सरकारें, संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन, केन्द्रीय विश्वविद्यालय/संस्थान और राज्य विश्वविद्यालय/संस्थान नए छात्रावास भवनों का निर्माण करने और मौजूदा छात्रावास सुविधाओं का विस्तार करने के पात्र हैं। गैर-सरकारी संगठन और मानित विश्वविद्यालय केवल मौजूदा छात्रावास सुविधाओं का विस्तार करने के लिए केन्द्रीय सहायता के पात्र हैं।
क्या गैर-सरकारी संगठन/मानित विश्वविद्यालय नए छात्रावास भवनों का निर्माण करने के पात्र हैं?
जी, नहीं। वे केवल मौजूदा छात्रावास सुविधाओं का विस्तार करने के पात्र हैं।
क्या होस्टलों अनुरक्षण भारत सरकार की जिम्मेदारी है?
जी, नहीं। इस योजना के तहत केन्द्रीय सहायता केवल छात्रावासों के निर्माण हेतु प्रदान की जाति है।
इस योजना के तहत निर्मित छात्रावासों के अनुरक्षण के लिए कौन जिम्मेदार है?
छात्रावास का अनुरक्षण करना संबंधित कार्यान्वयन एजेंसी, अर्थात् राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों, गैर-सरकारी संगठनों आदि की जिम्मेदारी है।
छात्रावासों में छात्रों की संख्या कितनी होनी चाहिए?
प्रत्येक छात्रावास की क्षमता 100 विद्यार्थियों से अधिक नहीं होने चाहिए।
इस योजना के तहत किस प्रकार का आवास प्रदान किया जाता है?
छात्रावास के प्रत्येक कमरे में 2-3 विद्यार्थी रह सकते हैं। एकल कमरा आवास की व्यवस्था नहीं है।
वित्त-पोषण की पद्धति क्या है?
कार्यान्वयन एजेंसी
लड़कों का छात्रावास
लड़कियों का छात्रावास
राज्य सरकार
50%*
100%
संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन
100%
100%
केन्द्रीय विश्वविद्यालय/संस्थान
90%**
100%
राज्य विश्वविद्यालय/संस्थान
45%***
100%
गैर-सरकारी संगठन/मानित विश्वविद्यालय
45%****
90% (बाकी 10% लागत एनजीओ/मानित विश्वविद्यालय द्वारा वहन की जाएगी)
* शेष 50% राज्य सरकार द्वारा शेयर किया जाएगा।
** शेष 10% लागत विश्वविद्यालय/संस्थान द्वारा वहन की जाएगी।
*** शेष 55% लागत 10:45 के अनुपात में विश्वविद्यालय/संस्थान और राज्य सरकार द्वारा वहन की जाएगी।
**** शेष 55% लागत 10:45 के अनुपात में गैर-सरकारी संगठन/मानित विश्वविद्यालय और राज्य सरकार द्वारा वहन की जाएगी।
यदि कोई राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन किसी गैर-सरकारी संगठन/मानित विश्वविद्यालय को अपना अंशदान नहीं देता है, तो उस स्थिति में क्या होता है?
ऐसे मामलों में, राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन का 45% शेयर गैर-सरकारी संगठनों/मानित विश्वविद्यालयों द्वारा वहन किया जाएगा।
सहायता अनुदान किसे जारी किया जाता है?
यह सीधे कार्यान्वयन एजेंसी को जारी किया जाता है।
कार्यान्वयन एजेंसियों को सहायता अनुदान किस तरह जारी किया जाता है?
राज्य सरकारें/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन और केन्द्रीय राज्य विश्वविद्यालय : अपेक्षित मैचिंग शेयर की वास्तविक रिलीज सुनिश्चित करने के बाद जारी की किया जाता है। गैर-सरकारी संगठनों/मानित विश्वविद्यालय : दो बराबर किस्तों में जारी की जाति है। पहली किस्त छात्रावास की मंजूरी के समय जारी की जाति है और दूसरी (अंतिम) किस्त वास्तविक एवं वित्तीय रिपोर्टों की प्राप्ति पर जारी की जाति है।
गैर-सरकारी संगठनों/मानित विश्वविद्यालयों को दूसरी किस्त जारी करने की अपेक्षाएं क्या हैं?
कम से कम छत के स्तर (रूफ लैवल) तक निर्माण कार्य पूरा हो।
पहली किस्त और लागू मैचिंग शेयर का पूरा उपयोग हो जाए।
इस योजना के अंतर्गत अन्य लाभ क्या हैं?
केन्द्रीय सहायता के अतिरिक्त, 2500/- रुपए प्रति विद्यार्थी की एकबारगी अनुदान सहायता एक चारपाई, एक टेबल और एक कुर्सी के लिए प्रदान की जाति है।
क्या गैर-सरकारी संगठन/मानित विश्वविद्यालय मंत्रालय को सीधे अपने प्रस्ताव प्रस्तुत करते हैं?
जी, नहीं। गैर-सरकारी संगठनों/मानित विश्वविद्यालयों से यह अपेक्षा की जाति है कि वे अपना प्रस्ताव राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन को प्रस्तुत करें, जो उसे अपने सिफारिशों के साथ मंत्रालय को अग्रेषित करेंगे।
क्या राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन की सिफारिश आवश्यक है?
जी, हां।
छात्रावासों का निर्माण करने की समय-सीमा क्या है?
छात्रावास का निर्माण कार्य, परियोजना की मंजूरी की तारीख से 2 वर्ष की अवधि के भीतर पूरा हो जाना चाहिए।
क्या इस योजना के अंतर्गत कोई वार्षिक पारिवारिक आय सीमा निर्धारित की गई है?
जी, नहीं।
क्या विद्यार्थियों को कोई प्राथमिकता दी जाति है?
उन अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को छात्रावास में आवास-आवंटन में प्राथमिकता दी जाति है जिनके माता-पिता या 'सफाई कर्मचारी' हैं अथवा अस्वच्छ व्यवसाय में संलग्न हैं।
क्या इस योजना के अंतर्गत निधियों का राज्य-वार आवंटन किया जाता है?
राज्य/संघ राज्य क्षेत्र में अनुसूचित जाति की जनसंख्या के आधार पर, लड़कियों और लड़कों के छात्रावासों के लिए राज्य-वार नेशनल आवंटन किया जाता है।
कृपया पिछले तीन वर्षों के दौरान आवंटित की गई निधियों, जारी की गई निधियों, संस्वीकृत किए गए छात्रावासों और लाभार्थियों का ब्यौरा दें?
7-मैनुअल स्केवेंजरों (हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों) के पुनर्वास की योजना (एसआरएमएस)
इस पृष्ठ में अनुसूचित जाति कल्याण से सम्बंधित मैनुअल स्केवेंजरों (हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों) के पुनर्वास की योजना (एसआरएमएस) के विषय में पूछे जाने वाले प्रश्नों का संकलन किया गया है।
मैनुअल स्केवेंजरों (हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों) के पुनर्वास की योजना (एसआरएमएस)
मैनुअल स्केवेंजर कौन हैं?
पहचानशुदा मैनुअल स्केवेंजरों की सूची में शामिल करने की प्रक्रिया क्या है?
पहचानशुदा मैनुअल स्केवेंजरों के पुनर्वास के लिए उपलब्ध लाभ क्या हैं?
एसआरएमएस के तहत लाभ कैसे उठाया जाए?
मैनुअल स्केवेंजरों के आश्रितों के लिए उपलब्ध लाभ क्या हैं?
मैनुअल स्केवेंजर कौन हैं?
हाथ से मैला उठाने वाले कर्मी - से ऐसा कोई व्यक्ति अभिप्रेत है, जिसको किसी अस्वच्छ शौचालय से या किसी खुली नाली या ऐसे गड्ढे में से, जिसमें अस्वच्छ शौचालयों से या किसी रेलपथ से ऐसे अन्य स्थानों या परिसरों से, पूर्णतया विघटित होने से पूर्व, मानव मल-मूत्र को हाथ से सफाई करने, उसको ले जाने, उसके निपटान में या अन्यथा किसी रीति से उठाने के लिए किसी व्यष्टि या स्थानीय प्राधिकारी या अभिकरण या ठेकेदार द्वारा लगाया जाता है या नियोजित किया जाता है।
पहचानशुदा मैनुअल स्केवेंजरों की सूची में शामिल करने की प्रक्रिया क्या है?
एमएस अधिनियम, 2013 की धारा 12(1) के तहत ''किसी नगरीय क्षेत्र में हाथ से मैला उठाने वाले कर्मी के रूप में कार्यरत कोई व्यक्ति, ऐसे नगरपालिका द्वारा जिसकी अधिकारिता के अधीन वह कार्य करता है, कराए गए किसी सर्वेक्षण के दौरान, या उसके पश्चात् किसी समय ऐसी रीति से, नगरपालिका के मुख्य कार्यपालक अधिकारी या उसके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अन्य अधिकारी को हाथ से मैला उठाने वाले कर्मी के रूप में पहचान के लिए आवेदन कर सकेगा।
एमएस अधिनियम, 2013 की धारा 15(1) के तहत
किसी ग्रामीण क्षेत्र में हाथ से मैला उठाने वाले कर्मी के रूप में कार्यरत कोई व्यक्ति, ऐसी पंचायत द्वारा जिसकी अधिकारिता के अधीन वह कार्य करता है कराए गए किसी सर्वेक्षण के दौरान या उसके पश्चात किसी समय ऐसी रीति से, संबंधित पंचायत के मुख्य कार्यपालक अधिकारी या इस निमित्त उसके द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य अधिकारी को हाथ से मैला उठाने वाले कर्मी के रूप में पहचान के लिए आवेदन कर सकेगा।
पहचानशुदा मैनुअल स्केवेंजरों के पुनर्वास के लिए उपलब्ध लाभ क्या हैं?
मैनुअल स्केवेंजरों के पुनर्वास की स्व-रोजगार योजना (एसआरएमएस) में पहचानशुदा मैनुअल स्केवेंजरों के पुनर्वास हेतु निम्नलिखित लाभों की व्यवस्था की गई है :-
40,000/- रुपए की एकबारगी नकद सहायता।
रियायती ब्याज दर पर 15.00 लाख रुपए तक स्व-रोजगार परियोजनाओं को शुरू करने के लिए ऋण।
3,25,000/- रुपए तक क्रेडिट लिंक्ड बैक-एंड कैपिटल सब्सिडी।
प्रति माह 3000/- रुपए के वजीफे सहित दो वर्ष तक कौशल विकास प्रशिक्षण।
एसआरएमएस के तहत लाभ कैसे उठाया जाए?
एसआरएमएस के तहत मैनुअल स्केवेंजरों के पुनर्वास हेतु प्रस्ताव, एसआरएमएस की कार्यान्वयन एजेंसी, अर्थात् राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त और विकास निगम (एनएसकेएफडीसी) को संबंधित राज्य सरकार द्वारा भेजे जाते हैं जिसके साथ पहचानशुदा मैनुअल स्केवेंजरों के बैंक खाता, आधार कार्ड के विवरण भी भेजे जाते हैं।
मैनुअल स्केवेंजरों के आश्रितों के लिए उपलब्ध लाभ क्या हैं?
पहचानशुदा मैनुअल स्केवेंजरों के आश्रित निम्नलिखित लाभों के पात्र हैं :-
वजीफे सहित कौशल विकास प्रशिक्षण।
स्व-रोजगार परियोजनाओं को शुरू करने के लिए रियायती ब्याज दर पर सब्सिडी सहित ऋण।
मैनुअल स्केवेंजरों के बच्चे, जो साफ-सफाई और स्वास्थ्य के लिए हानिकर व्यवसाय में संलग्न हैं, वे 'मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्ति' योजना के तहत मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्ति के पात्र हैं।

No comments:
Post a Comment
you have any dauts, Please info me know