5G नेटवर्क
टेक्नोलॉजी नुकसान (5G Network Nuksan)
तकनीकी
शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों के अनुसार एक शोध में पाया गया कि 5G तकनीक
की तरंगे दीवारों को भेदने में पूरी तरीके से असक्षम होती है। इसी के कारणवश इसका
घनत्व बहुत दूर तक नहीं जा सकता है और इसी के परिणाम स्वरूप इसके नेटवर्क में
कमजोरी पाई गई।
दीवारों
को भेदने के अलावा इसकी तकनीक बारिश, पेड़ पौधों जैसे
प्राकृतिक संसाधनों को भी भेदने में पूरी तरीके से असक्षम सिद्ध हुई है। 5G तकनीक
को लॉन्च करने के बाद हमें इसके नेटवर्क में काफी समस्या देखने को मिल सकती है।
कई
साधारण लोगों का मानना है, कि 5G तकनीक में जिन
किरणों का उपयोग किया जा रहा है, उनका परिणाम काफी घातक सिद्ध हो रहा है
और उसी का घातक परिणाम कोरोना वायरस है, परंतु अभी तक इस
विषय में कोई साक्ष्य प्राप्ति नहीं हो सकी है।
5G नेटवर्क
स्पेक्ट्रम बैंड (5G Network Spectrum)
5G की
नई तकनीक में millimeter-wave स्पेक्ट्रम अपनी महत्वपूर्ण भूमिका
निभाते हैं। इसका सर्वप्रथम विचार वर्ष 1995 में सबसे पहले
जगदीश चंद्र बोस जी ने प्रस्तुत किया था और उन्होंने बताया था, कि
इन वेब का इस्तेमाल करके हम कम्युनिकेशन को बेहतर बना सकते हैं। इस प्रकार की
तरंगे करीब 30 से लेकर 300 गीगाहर्टज
फ्रीक्वेंसी पर काम कर सकती हैं। ऐसी तरंगों का इस्तेमाल हम सैटेलाइट और रडार
सिस्टम के अंदर भी इस्तेमाल करते हैं। 5G नेटवर्क की नई
तकनीक करीब 3400 मेगाहर्ट्ज, 3500 मेगाहर्ट्ज और
यहां तक कि 3600 मेगाहर्ट्ज बैंड्स पर काम कर सकती है। इस नई
नेटवर्क तकनीक के लिए 3500 मेगाहर्ट्ज बैंड इसके लिए एक आदर्श
बैंड कह सकते हैं, क्योंकि यह सबसे मध्य का बैंड है और इसके साथ
ही यह काफी अच्छी कनेक्टिविटी भी प्रदान करता है।
5G नेटवर्क
का कोरोना कनेक्शन (Latest News)
हाल
ही में कई बड़े-बड़े सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर लोगों ने कहां है, कि 5G तकनीक
के टेस्टिंग के वजह से ही कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से फैल रहा है और कोरोना
वायरस के उत्पत्ति का भी कारण 5G तकनीकी है। इस प्रकार की ख़बरें हर एक
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 5G की तकनीक को लेकर फैल रही है। तो क्या
सच में 5G के कारण हो रही है मौत आइये जानते हैं क्या है
ये –
5G तकनीक
से जुड़ी हुई ये खबरें एक भ्रांतियां मात्र है. इन भ्रांतियों
के बारे में स्पष्टता से वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन यानी के डब्ल्यूएचओ ने एक
अधिकारिक जानकारी लोगों के साथ साझा की है. उन्होंने कहा है, कि
कोरोना वायरस का संक्रमण मोबाइल फोन नेटवर्क या फिर किसी अन्य रेडियो तरंगों के
साथ एक स्थान से दूसरे स्थान तक नहीं जा सकता है। साथ ही डब्ल्यूएचओ ने यह भी कहा
है कि करोना वायरस का संक्रमण उन देशों में भी है, जहां पर अभी 5G की
नेटवर्क टेस्टिंग तक नहीं की गई है और ना ही वहां पर अभी तक 5G का
मोबाइल नेटवर्क स्थापित किया गया है। फिर भी वहां पैर यह फ़ैल रहा है इसलिए 5g का
कोरोना से कोई संबंध नहीं है.
जब 5G की
नई तकनीक पूरी तरीके से कार्य करने लगेगी तब संपूर्ण विश्व में एक अलग ही विकास की
लहर दौड़ना प्रारंभ कर देगी। इस तकनीक के भारत में आ जाने से हमारे देश का विकास
और भी तीव्रता से होगा और नए नए रोजगार के अवसर लोगों को प्राप्त होंगे।

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