संभाग मैं p.p e किट के नाम पर हो रही कालाबाजारी
एकजुट होकर करो ना मारी से लड़ रहे हैं
ठीक उसी वक्त कई मुनाफाखोरी कसूर को बढ़ावा भी दे रहे हैं सरकार ने कर्ज माफ की
कीमत निर्धारित की है लेकिन आपको रोना मरीज की दी जाने वाली रेडी सीनियर दवा व इस
दौरान इस्तेमाल होने वाली पी की टिकट की कालाबाजारी मेडिकल मेहमानों को ताक पर रखकर की जा रही है कोविड-19 महामारी के संक्रमण को रोकने के लिए पी पी ई गेट पर्सनल प्रोटेक्शन
फीट का निर्माण किया गया है ताकि इसे पहचानने वाले डॉक्टर नर्स सहित करो ना योद्धा
जो इस महामारी के समय अपनी जान हथेली पर रखकर दिन रात काम कर रहे हैं इन्हीं
सुरक्षा प्रदान किया जा सके इसके लिए pp1 किट का निर्माण किया
गया है इससे हटकर बाजारों में बीपी किटको बिजनेस के रूप में देख कर बेचा जा रहा है
कालाबाजारी भी इसकी शुरू हो गई है जिले में सहित पूरे संभाग के प्रमुख दवा दुकानों
की ईपी 1 किट का रेट इसी वजह से दवाई मांग और बेच
रहे हैं दुकानदार मुंह देखकर ना सिर्फ उसके दाम तय करते हैं बल्कि मांग और पूर्ण
रूप से सिद्धांत भी यहां खुलेआम लागू हो रहा है मुनाफे को जेब में बाजार पीपी की
तो पहले बाजार में आई थी मैंने में काफी आसान था शुरुआत में इसकी कीमत 6 से ₹8000 तक थी अस्पतालों के
खरीदार मरीज से वसूले गए बिलों को जिला प्रशासन यदि हिम्मत दिखाकर जांच कर रहे हैं
तो अवसर वादियों का गंदा चेहरा सामने आ सकता है अप्रैल माह के बाद से अब तक बाजार
में दर्ज ने कंपनी की जाने लगी तो इस बात की है कि अब तक ठोक दुकान से खरीद की जा
रही है तो इसमें डॉक्टर की स्पीकर आदि की अलग-अलग रूपों में मिलते हैं अक्सर ने
अपने जेब भरने के लिए पूरा बाजार तैयारी कर रखा है जमकर कालाबाजारी मुख्यालय से
जिला में प्रमुख प्रतिष्ठानों से बेची जा रहे हैं सीबीआई कीट का ना सिर्फ अलग-अलग
मानकों की है ब्लाक के अधिकांश दो मानव के रूप में खारी ही नहीं उतारी वर्तमान में
300 से लेकर 12 तक जो किट बाजार में उपलब्ध है वह आरामदायक भी नहीं है जिसके बाद भी
वही पीपी किट सुरक्षित माना जा रहा है बाजारों में इसकी कालाबाजारी जमकर हो रही है
लोकगीत को खरीद रहे हैं मानक मेडिकल ने तय किया है इसके अनुरूप किट बेहतर नहीं है
इस महामारी काल में भी लोग कालाबाजारी से बाज नहीं रहे हैं यह दवा दुकानों पर हाल
क्रोना से संक्रमित मरीज और संभावित मरीजों की जांच भी अब सरकारी संस्थाओं को अलग
अन्य पैरामेडिकल पैथोलॉजी में भी होने लगे हैं यही नहीं ऐसे स्थान दवा भी बेच रहे
हैं बाजार में रेडीमेड को बनाने की फिलहाल तीन कंपनियों को इजाजत मिली है लेकिन
फिलहाल दवा दो ही दिन प्रमुख कंपनियों के बाजार में उपलब्ध है डॉक्टर के
दुकानदारों को यह दवा उपलब्ध कराई जानी चाहिए लेकिन यह तो सिर्फ बाजार खुला है
नहीं तो होगी कार्यवाही साला एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर राजेश पांडे ने चिंता
व्यक्त करते हुए कहा कि यह अलग हो रहा है शिकायत हमारे पास भी पहुंच रहे हैं उनके
पेट के लिवर तथा दवाओं के विक्रय करने वाले प्रतिष्ठानों को संचालित काल में आए
उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में भी होना चाहिए सब ठीक रहा तो कभी भी कमा सकता है
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कालाबाजारी व प्रतिष्ठानों को इस बात का ध्यान रखना
चाहिए प्रशासन की नजर से दूर ना रहे

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