750 का
बहुत ही शानदार व्याख्या उसमे कुछ प्राकृतिक, साइंटिफिक और पारम्परिक तथा व्यवहारिक
तथ्यों की बारीकियां आप के सामने प्रस्तुत करता हूँ....
---:
7 5 0 की व्याख्या :---
7..(सात)
-- प्रकृति से सम्बंधित है ~
जैसे :-- प्रकृति के 7 रंग, 7 दिन, 7 रात, 7 समुंदर, 7 स्वर , 7 देव
प्रकृति के इसी 7 के अनुसार गोंड़ में विवाह परम्परा का
निर्वहन होता है :--
शादी
में 7
भाँवर, 7
तेल चढ़ाना, 7
तेल उतारना, 7
गांठ हल्दी, 7 गांठ सुपारी,
(नार्रगढ़ी गांव व्यवस्था में हर गांव में सतबहिनी माता को
स्थापित करते हैं..!)
5
..(पांच) -- प्रकृति के मूल तत्व से सम्बंधित है, जिससे समस्त जीवों की उत्पत्ति
और
विनाश होता है...जैसे :--
शरीर के पांच तत्व - अग्नि, पानी, हवा, मिट्टी, आकाश,
धरती के तत्व मिट्टी (soil), खनिज (Mineral), रसायन
(Chemical), जल
(Water), हवा
(Gas),
शरीर
के पांच कर्मेन्द्रिय हाथ, पैर, मुंह, मलद्वार, उपस्थ,
शरीर के पांच ज्ञानेन्द्रिय आंख (देखना), कान (सुनना), नाक (सूंघना), जीभ (स्वाद)
त्वचा (स्पर्श),
इसी पांच के आधार पर आर्यों ने पँच परमेश्वर, पँच तंत्र, पँच रत्न की
रचना की तथा सरकार ने इसी पांच को आधार मानकर पंचायती राज की स्थापना किये..!
0 ~
शून्य (गोल) -- सौर मंडल के सभी ग्रह उपग्रह गोल, धरती गोल, जीव की उत्पत्ति
अंडाणु (गोल) से होती है, मां के गर्भ में भ्रूण (बच्चा) का आकार गोल
होता है, वर्षा
की बूंदों का आकार गोल होता है..!
750 के
सम्बन्ध में कुछ इतिहासकारों ने गोंडों के कुल गोत्रों की संख्या 750 बताया है, लेकिन गोंडों
में 750
गोत्र नही मिलते..!
वास्तविकता ये है कि गोंडों की उत्पत्ति
प्रकृति के निर्माण के साथ हुई है, यहां सभी मूल वासी गोंड़ थे, गोंड़ न जाति थी
न धर्म था..!
आयातित आर्य बाहर से आये और अपने स्वार्थ
पूर्ति के लिए यहां के मूल वासी गोंडों को काम के आधार पर 750 जातियों में
बांट दिए, जैसे
~ तेल
पेरने वाले तेली,
कपड़ा धोने वाले धोबी, लोहा के काम से लोहार, चमड़ा के काम
करने वाले को चमार....वगैरह वगैरह 750
जातियों (ST/SC/OBC)
में बांटने में कामयाब हो गए,
और मनुस्मृति व्यवस्था लागू कर चार वर्ण में
बांट कर जितने भी कामगार उत्पादक (ST/SC/OBC) को शुद्र वर्ण में इसलिए डाल दिये ताकि
उनकी सेवा करते रहे..!
यहां के मूल वासी सभी गोंड़ थे, आर्य गोंडों से
डरते थे तब गोंडों को साढ़ेसाती शनि समझते थे इसलिए आर्यों ने धर्म का आड़ लेकर मूल
वासी गोंडों को साढ़े सात सौ 750 जातियों में बांट दिए..!
दुख की बात है कि आज भी गोंड़ (ST/SC/OBC) ये
समझ नही पाया है और साढ़े साती शनि के प्रकोप से बचने के नाम से ब्राह्मणों का
चक्कर लगाते हैं,
मानो ब्राह्मणों के मंत्र से सौर मंडल का शनि ग्रह अपना रास्ता बदल
देगा..!
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