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Thursday, October 29, 2020

कोविड- के प्रति सत् कृ ता के कारण डेंगू मलेरिया जैसे संक्रामक बीमारियों में भी कमी आई

 

1-  कोविड- के प्रति   सत्  कृ ता के कारण डेंगू मलेरिया जैसे संक्रामक बीमारियों में भी कमी आई 


 

भारत में कब शुरू हुआ था उस समय मूलभूत सुविधाओं मानव संसाधन की कमी थी लेकिन पिछले 7 महीने से हमारे देश में स्वास्थ सुविधाओं बेहतर हुई है मलेरिया डेंगू जैसे अन्य कई बीमारियों से हम परेशान थे कोना के कारण हमारी मुश्किल और बढ़ गई   कोविड-19 रन लोग जिस तरह से सावधानी बरसते रहे हैं उसी मलेरिया डेंगू जैसी बीमारियों पर भी नियंत्रण हुआ है यह बात गोरखपुर के रीजनल मेडिकल सेंटर के डॉ रजनी कांत श्रीवास्तव ने प्रोजेक्ट संचार और टीचर जैन हेल्थ सेंटर द्वारा प्रबंधन विषय पर बुधवार को हुआ बेनियर में कही उन्होंने बताया कि फीडबैक कब आएगी और देश के सभी लोगों तक कब तक पहुंचेगी यह अभी स्पष्ट नहीं है ऐसे में लोग को करो ना के प्रति सकता मास्क लगाने शारीरिक दूरी का पालन से भी करो ना नियर में आईसीसीआर नेशनल पैथोलॉजी ने दिल्ली के पूर्व निदेशक डापूनम छात्रा ने बताया कि मरीज अभी कोविड-19 बुखार अन्य बीमारी में भी हॉस्पिटल जाने से घबरा रहे हैं जब भी किसी को बुखार आता है तुम मलेरिया को बीच में अंतर करना मुश्किल हो जाता है उसे नहीं है कि यदि कोई कोविड-19 जाए तो उसे मलेरिया नहीं होगा अभी इस पर रिसर्च चल रहा है कि फीवर पैनल बनाया जाए और कोई एक टेस्ट करने का अन्य बीमारी के साथ प्रोन्नति दी हो सके वेनियर में पटना से एस हॉस्पिटल की डॉक्टर वीणा सिन्हा की कारवां चुनाव के दौरान बृजेश की आवाज में मेडिकल टीम लगाने के कारण मलेरिया और दूसरी खेल कार्यक्रम पर असर पड़ा है लेकिन कोविड-19 उम्र कम होने के बाद अब अन्य संक्रमण बीमारी पर नियंत्रण का प्रयास किया जा रहा है बे नियर में शामिल लोगों को विशेष योग से सवाल पूछा मैंने जवाब दिया 

 सवाल -क्या करो ना कि दूसरे लहर आएगी

   जवाब- यदि देशवासी सतर्कता रखेंगे तो ऐसे लहार ही नहीं आएगी

 सवाल- डेंगू चिकनगुनिया के बुखार वरुणा में लक्षण होने पर कैसे पहचानेंगे

 जवाब-- पहले मरीज के कोविड-19 को पृथक दी जाती है इसके बाद उनकी अन्य जातियों के आधार पर मरीज का इलाज किया जाता है

 सवाल- कोविड-19 के प्रोत्साहन से बचाव के लिए क्या करें

 जवाब- मरीज के काउंसलिंग करते हैं ऐसे व्यक्ति एक्सरे इलाज कर और सृजनात्मक गतिविधि में शामिल हो

 सवाल- क्या जिन लोगों में हाटफक विकसित हो गए उन्हें वैक्सीन लगाने की जरूरत है

  जवाब- वैक्सीन आने के बाद 150 करोड़ लोगों को लगाना चैलेंज होगा एमडीयू बॉलीवुड 100 दिन से 5 माह तक रहती है जब व्यक्ति आएगी उसे प्रभावित आधार पर तय होगा

 सवाल- बीसीजी वैक्सीन भारत में कोविड-19 चौक कर रहा है

 जवाब*- जिन लॉक हो जाए वैक्सिंग लगी है उन्हें बचा तो मिला है इस पर रिसर्च स्पष्ट होना इसके अलावा हमारे भोजन में इस्तेमाल होने वाले हल्दी जीरा जैसे मसाले से भी बचाव में मदद मिली होगी 

 जवाब- पुराना संक्रमण का दुष्कर्म आंखों पर भी पड़ सकता है कुछ मामले ऐसे भी सामने आए जो बिल्कुल भी नहीं दिखा पा रहे हैं इसके वजह यही है कि करो ना कल कमाने दौरान ओमनी ब्लॉक अर्थात रक्त के दाम थके आंखों की नशे में जम जाती है और आंखों तक रक्त संचार नहीं हो पाता इस से 10% से लेकर 100% तक दूर दृष्टि जा सकती है ऐसे नहीं है कि इस समस्या का उपचार संभव नहीं लेकिन जरूरत है वक्त पर चर्चा करने की जैसी आंखों की रोशनी कम हो उस पर आप तुरंत नेत्र चिकित्सालय से जांच कर लें यदि चांद घंटों में उपचार मिल जाए तो समस्या दूर हो सकती है इसी दौरान चार कर देने पर दवाई से भी लाभ मिल सकता है ऑपरेशन की भी जरूरत नहीं पड़ती बेहतर यही होगा कि करो ना करा पूरी तरह से कराया और करुणा के बाद आंखों के बाद नेत्र रोग विशेषज्ञ बहरीन के किया जाएगा

 

 

2- करुणा का उपचार पूरी तरह नहीं करते उसमें समस्या की आशंका अधिक

 

 


 डॉक्टर रण सिंह ने बताया कि यह समस्या उन लोगों को ज्यादा होने की आशंका रहती है जोक रोना का उपचार पूरी तरह से नहीं करवाते अस्पताल में रहने या घर में रहने सरकार उपचार कराने की 14 दिन तक तो दवाई देते हैं लेकिन उसके बाद दवाई अन्य नियम ताक पर रख देते हैं * से ठीक होने के बाद भी यह बहुत जरूरी है कि कोना की दवाई और उपचार जितने भी दिन जारी रखने का कहा जाए उसका पालन करें अनुभव में 2 माह तक की दवाई इसलिए दी जाती है ताकि शरीर पर नशा आत्मक रोना पड़े रोना काल में आंखों को बहुत सहन पर रहता है इनके सामने रहने से आंखों में थकने और भूरे पन महसूस होता है स्क्रीन के सामने अधिक वक्त बीतने के बाद पिछले कुछ सप्ताह में 40 फ़ीसदी से अधिक बच्चों को आप में संबंधित समस्या हुई अपराधिक नींद भी आंखों के थकान की वजह है

 

3- भोपाल में अभी 15719 आईसीयू में 216 बिस्तर खाली

 


भोपाल प्रदेश के अन्य जिलों की तरह भोपाल में भी करो ना मरी की संख्या लगातार कम हो रही है 156 मरीज मिले हैं जबकि एक की मौत हुई है इलाज करा रहे सक्रिय मरीज भी कम हो रहे हैं लेकिन चिंता की बात यह है कि भोपाल में अभी एक 57 मरीज आईसीयू में हैं इनमें से ज्यादातर वाहन रिपोर्ट पर हैं जबकि 22 मरीज लेटर पर है असली आसपास के जिले में मरीज गंभीर हालत में भोपाल पहुंच रहे हैं जिसमें अन्य आईसीयू में रहना पड़ रहा है स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आई सी भर्ती मरीज में करीब 7 फ़ीसदी दूसरे जिले के हैं भोपाल की निजी और सरकारी अस्पताल में 470 हैं इनमें से 154 बिस्तर भर्ती है 

 

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