20 करोड़ साल पहले
गोंडवाना लैंड
गोंडवाना पूर्व नाम गोंडवाना लैंड वृहद महाद्वीप था जिसका अस्तित्व 55 करोड़ वर्ष पूर्व से लेकर जुरासिक पार्क आज से 18 करोड वर्ष पूर्व तक था यह गोंडवाना दक्षिण भाग का उत्तरी भाग को लारेशिया कहा जाता है गोंडवाना लैंड का नाम एडवर्ड्स ने भारत की क्षेत्र के नाम पर रखा था गुणा भाग आज के दक्षिणी गोलार्ध के अलावा भारतीय उपमहाद्वीप और जो वर्तमान में उत्तरी गोलार्ध में है उद्गम स्थल है
गोंडवाना नाम नर्मदा नदी की दक्षिण स्थित प्राचीन गणराज्य से उत्पन्न है जहां से * अकाल की दिलाओ पहले पहल विज्ञान जगत को बहुत हुआ था इनका नीचे पड़ा पूरा कल की अंतिम काल से अर्थात अंतिम कार्बन युद्ध से आरंभ होकर मध्य कल के अधिकांश समय तक अर्थात जुरासिक युग के अंत काल तक चलता रहा पूर्व कालीन विशाल दक्षिणी प्रायद्वीप के स्थलों एवं / विरोधियों में जो संभवत मंद गति से निमृत हो रही थी नरोरा निश्चित और साधु सिलसिला का निर्माण हुआ वरुण गांधी की स्मृति का सिलसिला बलुआ पत्थर अनखीला मिश्रा साकड़ा इत्यादि श्रीरामपुर स्वच्छ जल में निर्मित होने के कारण इन इलाकों में स्वास्थ्य एवं स्थलों तथा वनस्पतियों के के जीवाश्म का बाहुल्य और महासागरीय जीवन वनस्पतियों की जीवाश्म का अभाव है
इस महान स्थल खंड को गर्भ गीता में करवाना प्रदेश की संज्ञा दी कुछ विद्वानों का मत है कि यह प्रदेश एक विशाल भूखंड ना होकर अनेक विभागों का समूह था जो करें भूत संयोजक अथवा स्थल सेतु द्वारा एक दूसरे से संबंध थी इसके अंतर्गत भारत तथा समीपवर्ती देश ऑस्ट्रेलिया दक्षिणी अमेरिका एंटार्कटिका दक्षिण अफ्रीका और मुस्कराते जी इस काल की सिलाई जीव जंतु वनस्पतियों जलवायु विज्ञान के अध्ययन से ज्ञात होता है कि पूर्व कर्मी * प्रदेश के उपयुक्त अंतर्गत भावों पर दबाव में आश्चर्यजनक समानता इस प्रकार सिद्ध हो जाता है कि पूर्वकाली गढ़वा प्रदेश के अंतर्गत भाग गढ़वाल में एक दूसरे से उड़ता है अथवा आयोजकों द्वारा संबंध थे अन्यथा और वनस्पतियों का एक भाग दूसरे भाग में परी गमन असंभव था इसी कारण उत्तरी गोलार्ध में उत्तरी अमेरिका यूरोप तथा एशिया महादीप भी एक दूसरे से संबंध थे और एक अन्य विशाल भूखंड का निर्माण कर रहे थे जिसे क्या लारेशिया कहते हैं लारेशिया तथा * प्रदेश के मध्य नामा सागर था इन दोनों स्थल खंडों को मिला कर penjiya कहां गए
गोंडवाना प्रदेश का विखंडन मध्य काल के अंत में अथवा तृतीय तल के आरंभ में हुआ इस काल में एक विशाल ज्वालामुखी उदगार भी हुआ जो संभवत इस विखंडन की क्रिया से संबंधित या इसी का पूर्व संकेत था यह परिवर्तन संभव है अंतर्गत भूखंडों के तथास्तभागवत स्थल से दुआ से निवेदन से या इन विभागों की एक दूसरे से तोर खिसक जाने से संपन्न हुआ इसी के साथ-साथ बंगाल की खाड़ी अरब सागर दक्षिण अटलांटिक सागर इत्यादि का जन्म हुआ
यह बताया जा चुका है कि एक समय में एक दूसरे से संबंध होने के कारण भारत दक्षिण अफ्रीका ऑस्ट्रेलिया इत्यादि की पूरा भूगोल दशा में समानताएं पाई जाती है इस काल की भौगोलिक दशाओं के अध्ययन से ज्ञात होता है कि प्रारंभ में अर्थात अंतिम कार्बन युग में गुणा प्रदेश की जलवायु हिमानी थी जिसकी पुष्टि इस युग के बॉर्डर की उपस्थिति से होती है जो सभी अंतर्गत भावों पर मिलते हैं भारत की तालचेर दक्षिण अफ्रीका की दवाईका दक्षिणी पूर्वी ऑस्ट्रेलिया की दूरी तथा दक्षिणी अमेरिका की वीडियो 212 समुदायों की सिलाई इन्हीं बोल्डर कहां पर स्थित है इस काल में ग्लास पेरिस एवं गंग पॉपटेल इस वनस्पतियों की प्रांशु गुप्ता थी तथा उभयचर जीवो का भूतल पर प्रथम बार आगमन हुआ था तत्पश्चात आदरणीय कार्बन युग में मोटे कोयला स्तर मिलते हैं जो उसे एवं नव जलवायु की होता है क्योंकि प्रचुर वनस्पति की उपज के लिए जिसके द्वारा कालांतर में कोयले का निर्माण होता है इसी प्रकार की जलवायु की आवश्यकता होती है यह किस काल में निर्मित भारत की दक्षिण अफ्रीका तथा दक्षिण ऑस्ट्रेलिया की मेटलैंड उप समुदायों की सिलाई में मिलते हैं इस काल में कैलाश चौधरी वनस्पति एवं उभयचर जीवो का पूर्ण विकास हो गया था परंतु गंग मॉकटेल इस वनस्पति का हाथ हो रहा था
इसके उपरांत मधुवन आकार की आरंभ में अथवा आरंभिक ट्राई एक युग में जलवायु में उन्हें शीतलता आ गई जैसा इस काल की सेनाओं के अध्ययन से स्पष्ट विदित होता है इन सेनाओं में उपस्थित फेल्सपार के कणों में विघटन होकर विच्छेदन होगा विच्छेदन किया मुक्त शीतल जलवायु वाले प्रदेशों में तथा विघटन क्रिया समान एवं जलवायु के प्रदेशों में अधिक महत्वपूर्ण हैं इस काल की सिलाई भारत की पंच समुदाय दक्षिण अफ्रीका की विभाग तथा दक्षिणी पूर्वी आस्ट्रेलिया की हाफ सफारी उप समुदायों के अंतर्गत मिलती है इसके पश्चात अंतिम ड्राई 6 युग में जलवायु एवं स्वस्थ हो गई है इसकी पुष्टि इस काल के लाल वर्ण के बालों का से होती है जिसमे लौह युक्त पदार्थों का तथा वनस्पति पदार्थ पदार्थों का पूर्णत अभाव मरुस्थलीय जलवायु का बोधक है भारत में महादेव समुदाय की शिराएं इसी काल में निक्षेपित हुई थी मध्य पूर्व आना काल की वनस्पति हल्दिया इंडिया फाइल जिसने पूर्व कालीन गिलास से पेरिस वनस्पति का स्थान दिया था पृथ्वी पर सर्वप्रथम आगमन इसी काल में हुआ था विचारों की उम्र मीलों का भी गम था तब जीवो की दीवार इसी काल की निक्षेपित सिलाओ में मिलते हैं
गाना काल की अंतिम भाग में अर्थात जुड़े एक युग में जलवायु में पुनः समानता आ गई थी इसी काल की सिलावन वनस्पतिक पदार्थ मिलते हैं परंतु कोयले का निर्माण महत्वपूर्ण नहीं हुआ था मुख्य वनस्पति साइएड एवं फार्म है तथा मुख्य जीव ईस्ट एशिया एवं मीन है गोड़वाना कालका अथवा * प्रदेश का खंडन संभवत एक भीषण ज्वालामुखी उद्गार से हुआ जिसका उल्लेख ऊपर किया जा चुका है इस काल में मत वर्ष में राजमहल उप समूह तथा दक्षिण अफ्रीका में वर्ग समुदाय की शीलाओ का निक्षेपण हुआ था


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