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Thursday, August 20, 2020

गोंडवाना राज्य की मांग से जुड़ी हुई 8 रोचक जानकारियां ऐतिहासिक पृष्ठभूमि


गोंडवाना राज्य की मांग से जुड़ी हुई 8 रोचक जानकारियां ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
1- सेंट्रल एक समय सेंट्रल और विरार के साथ उत्तर तेलंगाना गढ़वा कहलाता था क्षेत्र में प्रमुख रूप से 4 गुण राज्य थे गढ़ मंडला 13 को ईश्वर से 1750 तक देवगढ़ 1590 इससे 1796 ईश्वर तक चांदा भारत इससे 1729 केरला 1500 तक 1600 से 100 तक 
2-गढ़वा नाराज की मांग तेलंगाना आंदोलन के समय से ही शुरू हो गई थी साल 1941 में आदिलाबाद की कुरमा भी मुंह पहले शख्स थे जिन्होंने करवाना राज्य की मांग की थी यह आंदोलन अगले दो दशक तक लगातार चलती रहेगी 1963 में अपने चरम पर थी लेकिन विभिन्न राज्यों के गुणों के अलग-थलग पड़ जाने से आंदोलन कमजोर पड़ गया और लगभग समाप्त हो गई
3- आदिवासियों का सुरक्षा का अभाव आंदोलन की समाप्ति की मुख्य कारण रहे जो 50 दशक के आखिर और शुरुआती 7 दशक के समय अगस्त 1959 में कंगला मांझी ने भारतीय संघ का गठन किया और राज्य की मांग की महाराज की मांग की थी 
4-साल 1956 में जब राज्यों का पुनर्गठन हुआ तो सरकार में पुराना राज्य की मांग को ठुकरा दिया 5 बरस की राजा श्याम लाल शाह और राजनांदगांव मध्य प्रदेश के सांसद ने जब प्रधानमंत्री नहीं दूसरा नाराज की मांग उठाई तो प्रधानमंत्री नेहरू ने इसे सिरे से नकार दिया इस पर राजा श्याम लाल शाह ने अपना इस्तीफा नेहरू को सौंप दिया
5- 19 मई 1963 को गोड़वाना  आदिवासी सेवा मंडल के अध्यक्ष नारायण सिंह उईके ने महाराष्ट्र की विदर्भ से सटे जिलों और छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों को मिलाकर छुड़वाना राज्य की मांग दोहराई 

6--इसके बाद कुछ दशक तक छोटे-छोटे आंदोलन होते रहे 1991 में गढ़वा नगर तंत्र पार्टी का संस्थापक हुआ जिसका प्रमुख लक्षण गढ़वा नाराज के लिए संघर्ष करना और उन क्षेत्रों को मिलाकर वाला राज्य बनाना है जो कभी गुणों के अधीन थे गोंड राजा वहां के शासक थी केंद्र में पिछले 60 दशक से भी ज्यादा शासक जातिवादी के होने इनके द्वारा गुणों की उपेक्षा और सहायता ना करने के कारण ही गवा नाराज का सपना अभी तक पूरा नहीं हो पाया है
7- भाषाई आधार और गोली भाषा की संगठित ना होने के कारण अभी तक जुड़वाना राज्य की मांग को ठुकरा ने का कारण बताया गया है विद्वान डॉ मोती रावण कंगाली इस कारण को बेतुका बताते हैं क्योंकि मध्य प्रदेश राज्य का गठन किसी भाषाई आधार पर नहीं हुआ है इसलिए नाराज की मां भाषाई आधार पर बल्कि गुंडों की हजारों साल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक इतिहास के कारण भी हो रही है जिससे अपनी संस्कृति को बचाए जल जंगल जमीन को बचाएं हिंदी राष्ट्रीयता हिंदी और हिंदू से निजात पाएं
8- पिछले 10 सालों में पूरे मध्यप्रदेश के गुणों में खुद पहचान होने का संघर्ष करना और विभिन्न संगठन जैसे बड़वाना महासभा गढ़ माना गिरिजन संक्षेमा परिषद महिला मंडल गोंडवाना गणतंत्र पार्टी आदि आदिवासी संगठनों के कारण नाराज की मांग को एक बार फिर बल मिल रहा है वही सोशल मीडिया नई पीढ़ी के गुणों के लिए एक वरदान जैसा है जिससे वे विभिन्न राज्यों के घोड़ों से भाईचारा और सामंजस्य बिठा के इस आंदोलन को और मजबूती दे सकते हैं पर दुर्भाग्यवश आंदोलन सामूहिक रूप से होकर अलग-अलग चल रहे हैं पिछले कुछ सालों से तेलंगाना में जुड़वाना राज्य की मांग लगातार चल रही है वहीं महाराष्ट्र मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के गुणों में भी इस तरह की उत्तेजना है अगर गॉड दशकों पुराने अपने पुराना राज्य के सपने को पूरा करना चाहते हैं तो उन्हें आपसी मतभेद और झगड़ा एक तरफ रख कर प्रशासन और स्वायत्तता के लिए आगे आना होगा 

नए संगठन बनाने से अच्छा है हम हमारे पुराने संगठन और आंदोलन को फिर से मजबूत करें अधिकारों के लिए सभी क्षेत्रों में प्रशिक्षण देना है ताकि सभी लोगों को पूरी जानकारी वह तब आंदोलन सफल होगा
A.           भारत का संविधान 1935
B.            ट्रेजरी रूल्स 1921
C.            लैंड रीडिंग रूल्स 1972
D.            एंटी एक्ट छोटा नागपुर टेनेंसी एक्ट
E.            अनुसूची 5 और 6
F.              अनुसूचीबोली भाषा
G.            गांधी इरविन पैक्ट
H.            सत्ता हस्तांतरण 1947 ट्रांसफर ऑफ पावर
I.               अनुच्छेद 13-3 का संविधान की विशेषज्ञों की व्यवस्था
J.             अनुच्छेद 19
K.            अनुच्छेद 244-1  244-2
L.             18- 91 से लेकर 1951 तक की जनगणना
M.            हिंदू अधिनियम 1955- 56 हम पर लागू नहीं होता है तो क्यों
N.            सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट 5 जनवरी 2011
O.            समता जजमेंट
P.            रामी रेड्डी जजमेंट
Q.           a/c भारत सरकार कुटुंब परिवार का दावा
R.            ओनर आफ इंडिया कुंवर केसरी सिंह गामित
S.            कोर्ट स्टांप रेवेन्यू टिकट 466 आकृति सत्यमेव जयते ₹1 की करेंसी राजस्व 19 वर्ष लिखकर आए करार 

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