समाज मे जागरूकता ही समाज मे जागृति लाती हैं
#अपनेआपकोपहचानिए
1. संविधान के अनुच्छेद-340 के अनुसार
समस्त ओबीसी हिन्दू नहीं हैं।
2. संविधान
के अनुच्छेद- 341 के अनुसार समस्त एससी हिन्दू नहीं हैं।
3. संविधान
के अनुच्छेद-342 के अनुसार समस्त एसटी हिन्दू नहीं हैं।
4. तो
फिर ओबीसी, एससी और एसटी क्या हैं?
उत्तर :- ये इस भारत देश के
मूलनिवासी हैं।
5. फिर
हिन्दू हैं कौन?
सवर्ण भी अपने को हिन्दू नहीं मानते आखिर क्यों?
क्योंकि वर्तमान में जो सवर्ण हैं उन्होंने ने विदेशी आक्रांताओं, मुस्लिमों, मुगलों
आदि से रोटी-बेटी का रिश्ता कायम किया है।
उन्होंने मुगलों को जजिया कर नहीं दिया था:- क्योंकि वे भी यूरेशियाई
विदेशी है, ये मैं नहीं भारत की सेलुलर एन्ड मॉलिक्युलर
बायोलॉजी की प्रयोगशाला हैदराबाद कह रही है।
6. फिर
हिन्दू है क्या:- हिन्दू फारसी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ गुलाम, चोर, धोखेबाज, काला
कलूटा होता है।
ये
मैं नहीं गूगल पर 'हिन्दू' शब्द सर्च करके
उसका अर्थ ढूँढिये। ईरान, इराक, अफगानिस्तान, अरब, यूरोप, अमेरिका
आदि देशों के निवासी भारत में रहने वाले सभी नागरिकों/मूलनिवासियों को हिन्दू कहते हैं चाहे वह मुस्लिम या सिक्ख या
जैन आदि ही क्यों न हो।
'हिन्दू' शब्द
सबसे पहले लिखित तौर गीता प्रेस गोरखपुर, हिन्दू
महासभा आदि ने 1923 में प्रयोग किया है। किसलिये :- ओबीसी, एससी, एसटी
को लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित करने के लिए।
7. आप
(ओबीसी, एससी और एसटी) संविधान के अनुसार हिन्दू नहीं
हैं। तो फिर किस मुँह से आप कह रहे हैं कि गर्व से कहो कि हम हिन्दू हैं।
8. ओबोसी, एससी
और एसटी द्वारा स्वयं को हिन्दू कहने से किसको लाभ हो रहा है और किसको हानि?
1947 से
2019 तक 72 वर्षों में ओबीसी जिसकी आबादी 52% है
उसकी आनुपातिक भागीदारी मीडिया, शिक्षा और उच्च शिक्षा से लगभग शून्य
हो गयी। कार्यपालिका में उच्चपदों पर केवल 1% सहित अन्य पदों
पर केवल 4% रह गयी। विधायिका में ओबोसी के लोग अपने
अधिकारों के लिए लड़ने के बजाय केवल अपना परिवार पाल रहे हैं और दलाली कर रहे हैं।
एससी और एसटी की आबादी 25% होने पर भी कुल मिलाकर उन्हें
कार्यपालिका, न्यायपालिका, मीडिया आदि में 10% भी
प्रतिनिधित्व उन्हें नहीं मिल पाया है।
9. निष्कर्ष
ये है कि इन 72 वर्षों में 77% मूलनिवासी
(ओबीसी, ऐसी और एसटी) लोकतन्त्र के चारों संस्थाओं से
या तो बाहर हो चुके हैं या ये लोग अपने समाज के लोगों के लिये नकारा साबित हो चुके
हैं।
#उदाहरण:
संविधान विरुद्ध होने पर भी क्या कोई मूलनिवासी सांसद या विधायक क्रीमीलेयर के
विरोध में खड़ा हुआ है?
एक
तरह से 50.5% पद सवर्णों के लिए आरक्षित किये जा चुके हैं।
संविधान विरुद्ध होने पर भी क्या कोई मूलनिवासी सांसद या विधायक इसका विरोध कर रहा
है?
आर्थिक आधार जनरल कैटेगरी को 10% आरक्षण संविधान
विरुद्ध है, कोई मूलनिवासी सांसद या विधायक क्या इसका विरोध
कर रहा है?
10. अतः
जब तक 77% मूलनिवासी अपने को हिन्दू कहे जाने का एक साथ
विरोध नहीं करेंगे तब तक उनके विरुद्ध सामाजिक, आर्थिक, शारीरिक, धार्मिक, शैक्षणिक
अपराध और अनैतिक कार्य होते रहेंगे।
क्योंकि उनके संवैधानिक अधिकारों का रखवाला कोई नहीं है और जो वहाँ हैं भी
वे केवल अपना या अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं उनको बहुजनों (ओबोसी, एससी
और एसटी) से कोई सरोकार नहीं रह गया है।
कुछ लोग आपके अधिकारों के रक्षक होने का नाटक कर रहे हैं, उनसे
भी होशियार हों जाने की ज़रूरत हैं।
गर्व से कहो कि हम भारत के मूलनिवासी है
जय
संविधान
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