दयाराम मार्को की ओर से आप सभी को
दोस्तों होली की आप सभी को बधाई आप और आपका परिवार खुशहाल रहे आपका जीवन हमेशा खुशियों से भरा रहे हैप्पी होली 2020
तब देख बहारें होली की
जब फागुन रंग चमकते हैं तब देख बहारें होली की
और 10 के शोर खड़क ते हो तब देख बहारें होली की
परियों के रंग दमकते हों तब देख बहारें होली की
खून शीशे जाम छलकते हैं तब देख बहारें होली की
महबूब नशे में जगते हो तब देख बहारें होली की
हो नाच रंगीली परियों का बैठे हो गुरु रंग भरे
कुछ भीगी तानें होली की कुछ ना जो अदा के ढंग भरें
दिल भूले देख बहारों को और कानों में रंग भरे
कुछ तबले खड़के रंग भरे कुछ एसके दम मुंह भरे
कुछ घुंघरू ताल सकते हो तब देख बहारें होली की
गुलजार खिले हो परियों की और मजलिस की तैयारियां हो
कपड़ों पर रंग की सीटों से खुश रंग का जनकारी हूं
मुंह लाल गुलाबी आंखें और
हाथों में पिचकारी हो रंग भरी पिचकारी को अंगिया पर टक्कर मारी हो
सीनों से रंग डालते हो तब देख बहारें होली की
और एक तरफ दिल लेने को महबूब भाइयों के लड़के
हरान घड़ी फिरते हो कुछ घट घट के कुछ गड़बड़ कर
कुछ ना जावे लड़ लड़ के कुछ होली गावे
कुछ लचके कमर पतली कुछ हाथ चले कुछ तन फड़के
कुछ काफिर नए मटकते हैं तब देख बहारें होली की
यह धूम मची हो होली की एस मजे का झक्कड़ हो
उस खींचा खींची द सिटी पर काफी हदीका फक्कड़ हो
माजून रवि नाच मजा और टिकिया सुल्फा कक्कड़ हो
लड़की के नजीर भी निकाला हूं कीचड़ में लक्षण पत्थर
जब ऐसे एस महकते हो तब देख बहारें होली की
2-
चुनर मोरी कोरी उमर मोरी गाली
धीरे रंग डालो करुणा जोरा जोरी
बरस भरे बीते तब आए कहीं होरी
झिझक नहीं हमसे निकट आजा गोरी
धीरे-धीरे पिचकारी मारो
नहीं मारो बेदर्दी से कस के
देखो देखो भयानक खींचो
मोहे तुम्हारी कसम मोहे लागे रसम
मानो मानो मानो मोरी
चुनर मोरी कोरी
भींगी भींगी चुनरी से झांके
तोरे मतवाले अंगों का जादू
आ जाओ मेरी बाहों में छुप जा
गोरी घबरा क्यों ना सिमट तू
मिले तन से ये तन
मुझे मन की लगन
कहे हम भी कि आई है होली
3-
निकलता जिन से कुछ मतलब उन्हें हुकुम कहता है
निकल जाता है जब मतलब वह झंडू बाम कहता है
पिलाने को जो बोलो तो कहे व्रत आज है मेरा
मगर पीने का मौका हो तो भर तू जाम कहता है
तरीका उसका अपना है किसी की चापलूसी का
पढ़े जब काम कर लूं उससे तो कालाजाम कहता है
टहलने भी नहीं जाता ना करता दंड बैठक वह
सुबह बस फूफा कर लेता उसे व्यायाम कहता है
पिलाकर जाम मुझको काम करवाता रहा अपना
लगी पीने की लत मुझको उमर खय्याम कहता है
जरूरत थी उसे जब तक मुझे कहता रहा बाबू
जरूरत हो गई पूरी तो आसाराम कहता है
हमारे नाम से जब नाम उसका हो गया काफी
हमारे नाम को ही आज वह बदनाम कहता है



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