महान भुमकाल के महानायक
अनिल धुर्वे का हूल जोहार स्वीकार हो......👋👋👋👋👋
आज मैं दिनभर आपको,आपके क्रांतिकारी साथियों और मुरिया राज की स्थापना के लिये दिकुओं के खिलाफ छेड़े गये महान भुमकाल को याद कर-कर के खुद को गौरवान्वित महसूस करता रहा हूँ और ताउम्र गौरवान्वित महसूस करता रहूँगा कि मेरे पूर्वज ऐसे थे।आप लोगों ने सन् 1910 में दुनिया और दिकुओं को बता दिया था कि हम गोंडवाना की संतान भी वीरता और दृढ़ता में,शांति और क्रांति में,राजनीति और रणनीति में किसी से भी कमतर नहीं हैं,लेकिन ये राजनैतिक छल और विभीषणी भूमिका के चलते हम मात खा जाते हैं।
महान भुमकाल के महानायक एक कहावत है कि "नालायक बेटे के बाप को मान-सम्मान नहीं मिलता है" इस लिए परमशक्ति फड़ापेन से प्रार्थना 🙏 हैं कि हम लोगों को इतनी ताकत वा सेहत प्रदान करें कि आप लोगों के बताये हुए रास्ते पर दो-चार कदम ही सही लेकिन मजबूती के साथ चल पायें।
"जय हो-जोहार हो,
लड़ाई आरपार हो"
तेलेंगा ने जोड़ी पंचैत को फिर से पुनगर्ठित किया था और अखड़ा को लड़ाई के नाच के लिए सजाया था। उसकी सांगठनिक और रणनीतिक कौशल व दूरदर्शिता को समझने के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि उने जोड़ी पंचैत को गांव-गांव में फिर से क्यों खड़ा किया और अखड़ा को युद्ध के नाच का ट्रेनिंग कैम्प क्यों बनाया? इतिहास पर नजर डालने से आप देखेंगे कि यह रणनीति सिर्फ तेलेंगा ने ही नहीं अपनाई, बल्कि यही कार्यशैली सिदो-कान्हू, बुध भगत और बिरसा मुंडा की भी थी। कम्युनिटी को संगठित करना और उसे राजनीतिक तथा सैन्यशक्ति के रूप में प्रशिक्षित करना। यही सोशियो-पॉलिटिकल एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम ट्रेडिशनल आदिवासी सेल्फ रूल का कोर है। आदिवासी समाज के सामुदायिक संरचना की मूल आत्मा है। बाहरी राजनीति, नियम-कानून और प्रशासन सबसे पहले इसी संरचना को धक्का पहुंचाते हैं। बिखेर देने की कोशिश करते हैं। जैसा कि तेलेंगा के समय में हुआ। हूल और उलगुलान के दौर में हुआ। इसीलिए सबसे पहले हमारे शहीद नायकों ने अपने बिखरते हुए सिस्टम को, परंपरागत आदिवासी स्वशासन को पुनर्गठित करने का काम किया ताकि वह बाहरी लूटेरों से लड़ने के लिए जरूरी पॉलिटिकल और मिलिट्री सिस्टम को खड़ा कर सके। आज हम अपनी लड़ाइयां इसलिए हार रहे हैं क्योंकि हमारे पास पुरखों का बनाया हुआ कम्युनिटी गवर्नेंस वाला ट्रेडिशनल आदिवासी स्प्रिचुअल, सोशल, पॉलिटिकल और मिलिट्री स्ट्रक्चर नहीं है। जिसको एक शब्द में जयपाल सिंह मुंडा ‘आदिवासिडम’ यानी ‘आदिवासियत’ कहते हैं।
आदिवासी धर्म कोड संख्या 7 आवंटित हुआ....

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