70 वर्षो से गुलामी में जी रहे समुदाय में अचानक 2 सालों में ऐसा क्या हुआ ? की युवा जोश एवम जुनून में है
साथियो हम सभी को पता है कि 70 वर्षो से हमारा
समुदाय जिल्लत की जिंदगी जी रहा है न कोई अधिकारों की जानकारी न कोई धरना प्रदर्शन
न कोई चु चपाट,,फिर अचानक ऐसा
क्या हुआ कि 2-3 वर्षो से
आदिवासी अपने अधिकारों के लिए सड़क पर आने लगे है किसने किया ,,निश्चित ही जयस अर्थात डॉ अलावा को इसका श्रेय
जाता है,,जनप्रतिनिधि पूर्व में भी
रहे है पर ऐसा दमदार जनप्रतिनिधि भी पहली बार ही देखने मे आया है जो अपनी ही सरकार
को आदिवासिय्यो के मामले में कटघरे में खड़ा कर सकता है,,कुछ लोग अभी भी 70 सालों की गुलामी से जानबूझकर नही निकलना चाहते ,,एक्चुअल में गलती उनकी भी नही है,,उनके पूछने वाले अब बचे नही है न ही मंच न फूलमाला तो सिर
पर सलवट पड़ना लाजमी है,,खेर जो भी है जयस
तो अपने कार्य को अंजाम देता रहेगा,अब इसमें किसी को
मंच मीले न मिले कोई पूछे न पूछे ये उनका मैटर है,, आपके सुझाव से मै101%सहमत हूँ आपने जो कहा बिल्कुल सही कहा अगर
लक्ष्य को प्राप्त करना है तो सभी को एक साथ एक मंच पर आना होगा नहीं तो अलग-अलग
संगठन बनाकर लड़ते बिखरते रहो लक्ष्य की प्राप्ति नहीं होगा राज पाठ उन्ही का होगा
जो हमारे समाज के दुश्मन हैं!!! जय
जोहार जय संविधान जय सेवा
टी आर(ध्रुव),चौहान
नेशनल जयस

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