आदिवासी समाज से अपील!! जय सेवा जोहार साथियों - jagoindia Sarkari Yojana : नई सरकारी योजना 2025

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Sunday, January 12, 2020

आदिवासी समाज से अपील!! जय सेवा जोहार साथियों


आदिवासी समाज से अपील!!

    जय सेवा जोहार साथियों

केंद्र की भाजपा सरकार  ने नागरिकता संशोधन एक्ट (CAA) लाया हैं और उसके समर्थन के लिये कई तरह के हथकंडों को अपना रही हैं !

, इसमे उन नागरिकों को भारत मे शरण दिया जाएगा जो बांग्लादेश, अफगानिस्तान, पाकिस्तान  से आकर भारत में बसना चाहते हैं और उनकी निवास अवधि 6 वर्ष पूर्ण हो, जिसमे वर्ष 2014 तक लिया गया है। जिनमे हिंदू, ईसाई, सिख, जैन, पारसी, बंगाली होंगे ! इसमे मुस्लिम लोंगो को नही रखा गया हैं !

भाजपा की सरकार अपने नेताओं को सिटीजनशिप एमेटमेंट बिल (CAA) को आम व्यक्तियों को समझाने के लिए प्रत्येक जिलों में मुहिम चला रही है जिसको लेकर हर भाजपाई नेता आप के घर तक पहुँचेगा। सावधान, आप जूते चप्पल लेकर तैयार रहे स्वागत के लिए

नागरिकता संशोधन बिल के द्वारा भारत के बाहर रहने वालो को भारत मे बसाने के लिये सरकार को प्रत्येक व्यक्ति को 10 एकड़ जमीन और मकान बनाने के लिये कम से कम 10-15 लाख रुपये देना पड़ेगा।

सरकार ने भारतवासियों को पहले से ही खूब लुटा हैं विकास के नाम पर, कालाधन, नोटबन्दी, भारत-पाकिस्तान, 1 करोड़ रोजगार, 370 का हटाये जाने के मुद्दा लाकर धोखा दिया हैं आज आम आदमी रोजगार के लिये तरस रहे हैं और सरकार कोई रोजगार के नए अवसर उपलब्ध नही करा रही हैं!

  भारत के आदिवासियों को सरकार खुद विस्थापित करने में लगी हैं आदिवासी बेरोजगारी, भूखमरी, कुपोषण, पलायन की समस्याओं से ग्रसित हैं क्योंकि आदिवासियों के अधिकारो को सरकार ने अनदेखा किया हैं कर रही हैं!

  भारत सरकार को जब जमीन देने की बारी आती है तब वह अनुसूचित क्षेत्रों को टारगेट करती हैं जैसा कि पहले आपने देखा होगा वर्ष 1972 में बांग्लादेश के शरणार्थियों को छत्तीसगढ़ में कांकेर, मध्यप्रदेश में बैतूल में उन्हें 5-5 एकड़ जमीन और घर बनाने के लिये रुपये देकर बसाया हैं , जो कि आज 15-20 एकड़ भूमि को कब्जे में करके रखे है साथ ही उन्हें ज़मीन के पट्टे भी दे दिए हैं और वही का आदिवासी आज भी जमीन के लिये परेशान हो रहा हैं जबकि वह सदियों से रहते रहे हैं!

भविष्य में यह अनुसूचित क्षेत्रों को टार्गेट करेंगे और आपके क्षेत्रों में गैर आदिवासियों को जमीन देकर बसायेंगे, क्योंकि सरकार को आदिवासी क्षेत्रों से जमीन लेना आसान समझती हैं!

भारत सरकार ने आदिवासियों के लिये संविधान में 5वी एवं 6वी अनुसूची के रूप में विशेष संविधान में बनाया हैं ताकि आदिवासियों का विकास हो सके और उनके अधिकार मिल सके! लेकीन इसके प्रचार प्रसार और समझाने, लागू करने के लिये घर घर कोई नेता नही भेजा हैं और ही कोई पहल की, हो पूर्णतः लागू करने हेतु कोई कार्यवाही की है!

  आज सरकार कानून बनाती हैं और तुरंत लागू करती हैं लेकीन आदिवासियों के लिये पहले से ही प्रावधान तैयार है उस पर कभी चिंतन नही किया हैं!


आदिवासी क्षेत्रो में कोई भाजपा नेता "नागरिकता संशोधन बिल" को लेकर समझाने आये तो पहले 5वी अनुसूची को जरूर समझाने के लिये कहे, क्योकि 6वी अनुसूची वाले राज्य (असम, मिजोरम, त्रिपुरा, मणिपुर) के आदिवासियों की स्थिति बहुत ख़राब कर रखा हैं!

भविष्य में आदिवासियों को बहुत ज्यादा प्रताड़ित होना पड़ सकता हैं क्योंकि गैर आदिवासियों ने हमेशा लूटने का प्रयास किया हैं!

नेता अपने पार्टियों के द्वारा बनाये गए कानून प्रचार करने के आपके घर तक आएगा जबकि पहले से हम आदिवासियों के लिये जो प्रावधान बनाये हैं उनको लागू करने के लिये सरकार के पास कभी नही पहुँचा!

आप आदिवासीे हो और कोई आप को क़ानून समझाने   आये तो पहले 5वी अनुसूची   और वन अधिकार अधिनियम 2006 को समझाने के लिये  कहे। यदि उसके द्वारा कहा जाता हैं कि हमें नही पता तो पढ़कर या पूछकर आने के लिये कहे , अन्यथा उसको अनुच्छेद 19(5)(6) के माध्यम से समझा कर वापस करे!

सबसे तेज वही चलता है,
           जो अकेला चलता है,

                   लेकिन

          दूर तक वही जाता है जो
      सबको साथ लेकर चलता है।
"कोशिश करे कि जिँदगी का हर लम्हा
     अपनी तरफ से हर किसी के साथ
                अच्छे से गुजरे,

  .....क्योकि, जिन्दगी नहीं रहती पर अच्छी यादें हमेशा जिन्दा रहती हैं......
🍁🌿🍁🌿🍁🌿🍁🌿🍁                 

         😊 सदा मुस्कुराते रहिये 😊

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