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Thursday, January 23, 2020

कबीर दास जी आज होते तो शूद्रों के लिए यही दोहे कहते:


कबीर दास जी आज होते तो शूद्रों के लिए यही दोहे कहते:

देवत पूजत जुग भया,रहे शूद्र के शूद्र।
प्रमोशन भी न मिला,गई तरक्की डूब।।

लगी दुकानें धरम की, शूद्र करै जयकार।
ब्राह्मण , बनिया हो रहे, दिनो-दिन मालामाल।।

ब्राह्मण की गति जानिये, बाम्भन है शैतान।
कर्मकाण्ड करवाइ कै, बन बैठा भगवान।।

ब्राह्मण घर-घर बैठता, जैसे करिया साँप।
झूम रहे है शूद्र जी,जैसे आ गये भोलेनाथ।।

स्वर्ग नरक के भेद करि, शूद्रन को दिया डराय।
लीला कला सुनाय कै, मेवा मिश्री खाय।।

जयकारा जय बोलि कै, शूद्रन खङे कतार।
जल्दी माल चढाई दे,नहि जइहै नरक के द्वार।।

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