राष्ट्रपति, राज्यपाल महोदय ने गलत किया, जिसका हर्जाना आदिवासी भुगत रहा है, पर संविधान के अनुसार अनु 361 का हवाला देकर माननीय कोर्ट ने राष्ट्रपति को बचा लिया, की किसी भी कार्य के लिए राष्ट्रपति कोर्ट में जवाबदेह नही है👇👇
That article 361 of the Constitution
of India envisages that the president shall not be answerable to any Court for
the exercise and performance of the powers and duties of his office or for any
act done or purporting to be done by him in the exercise and performance of
those powers and duties. - #MD ashique ahmad vrs Union of india 2016
🌾🌷संविधान के अनुच्छेद 361 के अधीन राष्ट्रपति को अपराधिक एवं सिविल विधि से मुक्ति प्रदान की गई है.. राष्ट्रपति पद पर बने रहने की अवधि के दौरान राष्ट्रपति के विरुद्ध ना तो कोई आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है और ना ही उन्हें दीवानी विधि के अधीन किसी भी तरह के दायित्व से अवैध किया जा सकता है..
इसी तरह से उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के साथ भी कुछ ऐसी व्यवस्था लागू की गई हैं ,
🌾🌷5वी अनुसूची के अनुसार जिन राष्ट्रपति, राज्यपाल महोदय ने गलत किया, जिसका हर्जाना आदिवासी भुगत रहा है,
पद पर बने रहने की अवधि के दौरान राष्ट्रपति राज्यपाल के विरुद्ध ना तो कोई आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है और ना ही उन्हें दीवानी विधि के अधीन किसी भी तरह के दायित्व से अवैध किया जा सकता है, ये सारी बाते
संविधान पद पर बने रहने की अवधि तक रोक लगाती है पद पर उतरने के बाद नहीं, या फिर हर संवैधानिक पद Rule of law के विरुद्ध नही जा सकती..
🌻🌷कोर्ट में संविधान प्रदत्त मांग करने पर, और ये बात पूछने से treaty , grant, होने की या सारवान प्रश्न उठने पर मामला लंबित कर 5 जज से ज्यादा की बेंच बिठाने का आदेश दिया गया,
1.)इस बीच आदिवासी आंदोलन से त्रस्त होकर क्यों न indian independence act 1947 के सेक्शन 7a, b, c का हवाला दे??
2.)या फिर 3 जून 1947 के ब्रिटिश इंडिया के प्लान का??
3.) या फिर संविधान सभा के जयपाल सिंह मुंडा के नागालैंड का भारत में शामिल होने से इनकार का वाद विवाद, या आजाद भारत के पहले आदिवासी हत्याकांड #सरायकेलाखरसावांहत्याकांड का, जो कि अलग झारखंड देश (इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट 1947 सेक्शन 7b,7c ) की मांग को दबाने के लिए हुए थे, जबकि ब्रिटिश भारत 7(a) में आदिवासी क्षेत्र(7b,7c) नही थे, और भारत का संविधान लागू भी नही था??
4.) क्यों नही कोर्ट में इस आजाद भारत के पहले हत्याकांड की जांच की मांग की जाए??
5.) और क्यों न संविधान सभा के उस वाद विवाद का जिक्र किया जाए जिंसमे #सरायकेला_खरसांवा हत्याकांड 1 जनवरी 1948 के बाद उड़ीसा के आदिवासियों ने अपने लिए संविधान बनाए जाने से मना कर दिया था, पर जबरन देश के अंदर देश, और संविधान के अंदर संविधान बोल के , और foreign जुरीडिक्शन एक्ट 1947 के अनुसार all law इन force या रूढ़ि प्रथा या स्थानीय विधि के अनुसार, तुम्हारे गांव के संविधान के अनुसार ही कानून लगाएंगे बोल के झुनझुना दिया गया..
ये सारे मामले कोर्ट में तो आने ही चाहिए, तभी तो मालूम चलेगा, की दूध क्या और पानी क्या है..
वी पी सिंह हारी (बाजना ) जी की कलम से...
जोहार
हमारे पुरखे आदिवासी थे आदिवासी हिंदु नही थे आदिवासी ही कबिलाई थे प्रत्येक कबिले का एक टोटम अर्थात आराधय् होता था. सबूत के साथ देखे..
आज भी आदिवासी है जो कबिलो मे निवास करते है वो आज भी ना हिन्दु है ना मुस्लमान है ना सिख है ना बौद्ध है..
पर उनका अपना एक टोटम अर्थात आराधय् है. फिर प्रश्न उठता है कि आदिवासी कौन है..?
आदिवासी कोनसा धर्म मानता है ?
आदिवासी की परम्परायें क्या है ?
आदिवासियों की कोई भी परम्परा अन्य धमों से मेल क्यो नही खाती है ?
एेसे अनेकों प्रश्न है जो यह सोचने पर मजबूर करते है कि आदिवासी वास्तव में कौन है ?
आईये आज देखते है कि आदिवासी कौन है।
(1) जनगणना के आकडों के अनुसार आदिवासी क्या है ?
भारत देश की जनगणना केन्द्र सरकार द्वारा प्रत्येक 10 वर्ष के अन्तराल पर सम्पन्न कराई जाती है। जनगणना में सभी प्रकार के आकड्रे मौजुद रहते है।
भारत की जनगणना की शुरूआत अंग्रेजों ने 1871-72 में की थी, तब से लेकर आज तक प्रत्येक 10 वर्ष में यह जनगणना सम्पन्न कराई जाती है।
आईये देखते है..
जनगणना के आकडों के हिसाब से आदिवासी को क्या कहा गया है।
जनगणना वर्ष आदिवासी के लिये प्रयुक्त शब्द पेज नम्बर
1871 Aborgine 17, 18,19,22,23 CENCUS
1871
1881 Aborigional 51, 54,96,128 CENCUS
1881
1891 Aborigional 25,27,35,49,57
CENCUS 1891
1901 Animist 57, 68, 76,80,103,268
CENCUS 1901
1911 Animist 24, 44, 52, 56,57 CENCUS
1911
1921 Animist 14, 26, 38, 40, 53
CENCUS 1921
1931 Tribal Religion 4, 202, 222,
223,225 CENCUS 1931
1941 Tribes 3, 31,108, 117, 119,137
CENCUS 1941
1951 Shedule Tribe 142, 144, 139, 196
CENCUS 1951
1871 से लेकर 1941 तक की जनगणना में आदिवासी को अन्य धमों से अलग धर्म में गिना गया है, जिसे Aborgines, Aborigional, Animist, Triabal Religion, Tribes आदि कहा गया है।
आदिवासी की गणना अलग ग्रुप में की गई है, लेकीन 1951 की जनगणना से आदिवासी को Shedule Tribe बना कर अलग गिनती करना बन्द कर दिया गया है।
क्यों आदिवासी का अलग धर्म खत्म कर दिया गया ?
1951 की जनगणना के पेज नम्बर 136 पर लिखा है कि –
In 1901 Animism was treated as
separate religion, in 1931 .Animism was replaced by the Tribal religion and in
1941 the concept of religion gave place to that of community..
इसका मतलब साफ है कि 1951 में आकर मंडि-फंडि की सरकार ने आदिवासी को जबरदस्ती अपने राजनैतिक फायदे के लिये अन्य धमों में शामिल कर दिया, जबकी इससे पहले आदिवासी की गणना अलग धर्म के रूप में की गई थी।
1951 की जनगणना के पेज नम्बर 196 पर लिखा है कि – E.A. Maxwell कनाडा से बांसवाडा में आदिवासियों के रिती-रिवाज और परम्पराओं पर अध्ययन करने के लिये आई थी. उसने आदिवासियों से उनकी परम्पराओं पर निम्न बातें जानी..
(a) They do not, as a regular rule
worship before Hindu idols,
वे हिन्दुओं की मुर्तियों के आगे प्रार्थना नही करते थे।
(b) They do not enter Hindu temples,
वे हिन्दुओं के मन्दिरों में नही जाते थे।
(c) Thoy do not have images of idols
in their houses,
उनके घरों में देवी-देवताओं की मुर्तियां / फोटो नही होते थे..
आप सब यौद्धेय साथी समझ रहे होगे कि इन सब का हमारे आज से क्या सन्दर्भ है सन्दर्भ है क्योकि जो ठंगी हमारे पुरखो से सदियो पहले की..
जिस प्रकार की.. ठीक उसी प्रकार की ठंगी मंडि-फंडि की सरकारे वर्तमान मे सात बहनो के आदिवासियो ओर अन्य क्षेत्रो के आदिवासियो अर्थात कबिलाईयो से कर रहे है..
इतिहास वो नही है मंडि-फंडियो ने लिखा है अपितु वो है जो इन्होने छुपाया है..
मिशन 2021 जनगणना।
[11:35 AM, 12/28/2019] +91 97532
34626: विशेष सूचना
जय आदिवासी जय सेवा जय जोहार
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
आप सभी समस्त समाजिक संगठनों से अनुरोध है की कल दिनांक 29 दिसंबर 2019 को बैठक कर आगामी भविश्य हेतू कार्योजना तैयार की जायेगी आज के परिवेश में चल रही हल चल से निपटने के लिए तैयारियों पर चर्चा की जायेगी
समय 12:00 दोपहर
राजेन्द्र ग्राम
निवेदक
समस्त समाजिक संगठन पूष्पराजगढ
[11:39 AM, 12/28/2019] +91 84628
23699: शूचना पहुंचने के लिए धनवाद जय सेवा
[6:55 PM, 12/28/2019] +91 95894
47222: विभिन्न गोंडों की गोत्रावली आप की जानकारी हेतु
ध्रुव वंश गोत्रावली
तीन देव:- सोरी, मरकाम, खुसरो
चार देव :-
नेताम, टेकाम, करियाम, सिंदराम.
पांच देव :-
पडोती, पद्राम, पुराम, किले, नहका, नमृर्ता
छ: देव:-
कतलाम, उइका, ओटी, कोर्राम, तुमरेकी, कोड़प्पा, कोमर्रा, कोहकटा, पट्टा, अरकरा, दराजी, सलाम, पुसाम, पावले, घावड़े, ततराम, जीर्रा, मातरा,गावडे़, कुमेटी,
सात देव :- कुंजाम, सेवता, मरई (मंडावी), खुरश्याम, ताराम, पंद्रो, श्याम
मुख्य देवगढ़
तीन देव:- "धमधागढ़"
चार देव:- "लांजीगढ़"
पांच देव:- "बैरागढ़"
छ:देव:-
"चांदागढ़"
सात देव:- "मंडलागढ़"
टीप:- यह गोत्र व्यवस्था दुर्ग, रायपुर, राजनांदगांव के प्लेन क्षेत्र में प्रचलित है..!!
माठिया गोंड
यह बिलासपुर, रतनपुर एवं सरगुजा वनक्षेत्र में प्रचलित है:-
तीन देव:- धमधागढ़, शांडिल्य गोत्र बाघ बाना
मरकाम, नेटी, खुसरो, सोरी, सिरसो, पोया
चार देव:- रायसिंघोरागढ़, गोत्रगुरूप,बाना फुलेशर
टेकाम, नेताम, आयम, केराम, करियाम, शिवराम, मर्सकोला, तिलगाम, सिंगराम, घुरायम, धुरवा, लेडाम, पुसाम, ओची, परपची, उडवाची, झिकराम, झुकरा
पांच देव:- हीराग, कांशी, गोत्र कटककेसर बाना
ओटी, पोटी, सवाम, चिरको, डफाली
पांच देव:- बैरागढ़, शेया गोत्र, परथ बाना
परते, कमरो, कोरचो, ओलको, चेचाम
छ:देव:- देवगढ़, पुहुप गोत्र, नाग बाना
उइका, उर्रे, अरमो, ओरकेरा, कोर्राम, मरापो, ओड़े, ओडाली, पावले, नगतध्रुर्वा, पोटा, नीरा
सात देव:- गढ़ मंडला, आंडिल्य गोत्र, नाग बाना
मरावी, मसराम, श्याम, सरूता, मलगाम, मर्सकोला, करपे, पंद्रो, घेराम, सोरटिया, आरमोर, कंगाली, भलावी, मलावी, बदिहा, कोलिहा
पहरिया गोंड
इसमें देव व्यवस्था नही होती सिर्फ पक्ष विपक्ष होता है..
प्रथम पक्ष_
गावड़े, नेताम, टेकाम, कोर्राम, कोमर्रा, कुमेटी, मरकाम, करलाम, पोया, पद्दा, पदोटी, तुमरेकी, उइका, सलाम, कमरो, उसेंडी, हिडको, सोरी, पुडो, नुटी, तटा, वट्टी, तोपा, मतलामी, मर्रापी, परचापी, होडोपी, होडोषी, हिरामी, हिचामी, हर्रो, कोवाची, केराम, कोरचा, कमरो, कुमेटी, करियाम,
द्वितीय पक्ष-- मरई, कुंजाम, श्याम, ध्रुर्वा, कोरोटी, दर्रो, कौड़ो, खुरश्याम, सेवता, गोटी, पोया, पदागोटा, नुरोटी, नेरोटी, वरवेटी, नरेटी, कल्लो, आ्चला, दुग्गा, तुलाई, तारम, करंगा, बोगा, पोटई, हुर्रा, कोला
इसमें सिर्फ दो घराना होते हैं .या कह सकते हैं सम व विषम या लिंगो दर्शन के अनुसार पितृ पक्ष एवं मातृपक्ष ,सम पितृ पक्ष २,४,६,८,१०,१२ देव तथा विषम मातृ पक्ष १,३,५,७,९, देव
बोरदा, शक्ति क्षेत्र की वंशावली.
गोंड सात वंश के हैं
१,सुर्यवंशी (देवगढ़ चांदा ) गोत्र पारेश्वर ६ भाई जगत, १.धुरवा,२.पोखर ३.पोटा ४. भोय ५. गड़तिया ६. धोवा बनवास मांझी
२. सोमवंशी.
पोर्रे ( बैरागढ़ ) गोत्र अत्रि
५ भाई पोर्रे ( पोर्ते )१.नेताम,२.कामेरा ३. मांझी ४.राय ५. भुलेटर
३.गंगवंशी नेताम (लांजीगढ़) गोत्र_कश्यप,४ भाई
नेताम, टेकाम, मरपाची, केवाची
४. गाग्रमवंशी मरकाम (धमधागढ़) शांडिल्य ५ भाई
१.टेढ़ी मरकाम,२. डुडी मरकाम ३. सहाड़ मरकाम ४.सेत मरकाम ५.साल मरकाम
५.जदुवंशी नेट (सम्हरगढ़ ) गोत्र अन्डील ३ भाई नेटी
६.कदमवंशी ओटी(आलंका भुवन मठ )गोत्र पुलस्त ६ भाई ओटी १.डोंगर गछा २.डाही डोरा ३.भद्रा ४.बिसोरिहा ५. बहीगा ६. सील
७.नागवंशी मरई(मरावी )गढ़ मंडला ,गोत्र पुहुप ७ भाई १.गुटाम २. कुंजाम ३. पुसाम ४. पुरकाम ५. साय ( साही) ६. राय ७. कांदरो
नोट :- राज गोंड वंशावली अलग है जो ध्रुव वंश और अमात्य गोंड़ के साथ मेल खाता है..!!
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