जयस एक्सप्रेस - पुष्पराजगढ़
(अवश्य पढ़ें )
#खरसावांगोलीकांड...
वहीं हमारे संघर्षों से ही जुड़ी हुई 1-2 जनवरी 1948 को घटित एक दूसरी घटना है जिसे सुनकर हमारी आंखें भर जाएंगी। उस घटना का नाम है खरसावां गोली कांड। खरसावां नामक जगह पर अपनी जमीन का ओड़िसा राज्य में विलय का विरोध कर रहे बेबस लाचार आदिवासियों पर अपनी जातिगत मानसिकता ,संवादहीनता तथा धैर्यहीनता से ग्रस्त निर्दयी हुकूमत के आदेश पर पुलिसिया गुंडो ने हजारों आदिवासियों पर गोलियों का बौछार कर दिया जिसमें हजारों आदिवासी मारे गए। आज़ाद भारत के इतिहास में सवर्णनीत सरकार द्वारा ढाए गए जुल्मों में यह अब तक कि सबसे शर्मनाक हरकत है। हमें गर्व हैं बिरसा मुंडा की इस विरासत पर जो कि मौत को सामने देखते हुए भी मौत को मारने के लिए लड़ जाते हैं लेकिन झुकना पसंद नहीं करते हैं। आखिर झुकेंगे भी क्यों इस देश के आदिवासी मूलनिवासी जो ठहरे। "आदिवासी हैं रे, मूलनिवासी हैं रे... मर जाएंगे, मार जाएंगे पर अपनी जमीन नहीं देंगे।" आखिर में बिरसा मुंडा के नारा 'अबुआ. दिसुम-अबुआ राज' तथा 'उलगुलान' की जय जयकार करते हुए खरसावां कांड में शहादत को प्राप्त सभी शहीदों को अपने भीगी आंखों से पुष्पराजगढ़ जयस की ओर से शत शत नमन। (आर .पी .सिंह )जिला अध्यक्ष जयस अनूपपुर , (श्री रघुबीर सिंह मरावी) जिला महासचिव अनूपपुर
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