15 माह
पूर्व सरकार गठन हुई और जनवरी-फरवरी 2019 में शिक्षक भर्ती की परीक्षा हुई,परीक्षा के 10 माह
बाद एक शिक्षक भर्ती काउंसिलिंग न शुरू कर पाने वाले नकारे,कामचोर,पदलोलुप,चाटुकार मंत्री
और अधिकारियों को क्या ये नही पता कि जब तुम शिक्षक भर्ती ही नही करोगे तो स्कूलों
में पढ़ाई कैसे होगी?
पूरे प्रदेश के सभी मंत्रियों की ली गयी परफार्मेंस में शिक्षा मंत्री सबसे नीचे है,उनके विभाग में शीघ्र करते करते 10 माह बाद काउंसिलिंग 1 दिसम्बर से शुरू नही हो पाई,ये सत्र भी अध्यापक विहीन बीत रहा है ,जब संबंधित मंत्री अपने ही कहे शब्दो पर कायम नही रहते है तो उन्हें भी तुरन्त पद मुक्त कर देना चाहिए!
अब बात अधिकारियों की..हिंदी के अध्यापक से गणित और कला के अध्यापक से साइंस पढ़वाते हुए 2011 से अब तक 8 साल बीत गए कोई भर्ती न हुई,जब परीक्षा शुरू हुई तो भर्ती भी होनी थी तो अधिकारी फरवरी से अब तक क्या कर रहे थे जो अतिथि शिक्षकों के अनुभव प्रमाणपत्र न बना पाए ऐसे अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्त दे देना चाहिए।
सत्र दर सत्र अपनी नाकामयाबियों को छुपाते हुए सारा दोष अध्यापको पर देने वाले नीति निर्धारकों शिक्षा व्यवस्था को चौपट करने के लिए तुम सबसे ज्यादा जिम्मेदार हो,सरकारे बदलती रही,मंत्री बदलते रहे,शिक्षक रिटायर होते रहे लेकिन नए शिक्षक नही आये,बंधुवा मजदूर जैसे मानदेय पर प्रदेश के अध्यापक पढ़ाते रहे,कहाँ गए एक देश एक समान वेतन के नियम यूपी,बिहार में वर्ग 1 का ग्रेडपे 4800 मप्र में 3600 जो क्रमशः अन्य पदों पर कम होता जाता है।एक शिक्षक और 50 काम ऊपर से जबरन सेवानिवृत्त-नही चलेगी!
कब तक जुल्मी जुल्म करेगा सत्ता के गलियारों से,चप्पा चप्पा गूंज उठेगा इंकलाब के नारों से।
पूरे प्रदेश के सभी मंत्रियों की ली गयी परफार्मेंस में शिक्षा मंत्री सबसे नीचे है,उनके विभाग में शीघ्र करते करते 10 माह बाद काउंसिलिंग 1 दिसम्बर से शुरू नही हो पाई,ये सत्र भी अध्यापक विहीन बीत रहा है ,जब संबंधित मंत्री अपने ही कहे शब्दो पर कायम नही रहते है तो उन्हें भी तुरन्त पद मुक्त कर देना चाहिए!
अब बात अधिकारियों की..हिंदी के अध्यापक से गणित और कला के अध्यापक से साइंस पढ़वाते हुए 2011 से अब तक 8 साल बीत गए कोई भर्ती न हुई,जब परीक्षा शुरू हुई तो भर्ती भी होनी थी तो अधिकारी फरवरी से अब तक क्या कर रहे थे जो अतिथि शिक्षकों के अनुभव प्रमाणपत्र न बना पाए ऐसे अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्त दे देना चाहिए।
सत्र दर सत्र अपनी नाकामयाबियों को छुपाते हुए सारा दोष अध्यापको पर देने वाले नीति निर्धारकों शिक्षा व्यवस्था को चौपट करने के लिए तुम सबसे ज्यादा जिम्मेदार हो,सरकारे बदलती रही,मंत्री बदलते रहे,शिक्षक रिटायर होते रहे लेकिन नए शिक्षक नही आये,बंधुवा मजदूर जैसे मानदेय पर प्रदेश के अध्यापक पढ़ाते रहे,कहाँ गए एक देश एक समान वेतन के नियम यूपी,बिहार में वर्ग 1 का ग्रेडपे 4800 मप्र में 3600 जो क्रमशः अन्य पदों पर कम होता जाता है।एक शिक्षक और 50 काम ऊपर से जबरन सेवानिवृत्त-नही चलेगी!
कब तक जुल्मी जुल्म करेगा सत्ता के गलियारों से,चप्पा चप्पा गूंज उठेगा इंकलाब के नारों से।

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